ret jaisa fisal gaya mujhse | रेत जैसा फिसल गया मुझ सेे

  - Aqib khan
रेतजैसाफिसलगयामुझसेे
वक़्तआगेनिकलगयामुझसेे
वोजोसूरजथामेरेहिस्सेमें
शामसेपहलेढलगयामुझसेे
माँनेफेराथासरपेहाथमेरे
ख़ुद-ब-ख़ुदख़तराटलगयामुझसेे
वोजिसेचुपकरापायाकोई
जानेकैसेबहलगयामुझसेे
तुझकोतोक़द्र-ए-कामयाबीहै
फिरभलाक्यूँँतूजलगयामुझसेे
सब्रबे-इंतिहाकियाथासो
सब्रकाथाजोफलगयामुझसेे
वक़्तबदलातोसबबदलनेलगे
सिक्काखोटाभीचलगयामुझसेे
  - Aqib khan
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