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Mohd Afsar
khaamoshi
khaamoshi | "ख़ामोशी"
- Mohd Afsar
"ख़ामोशी"
ख़ामोशी
आ
बात
करें
तुम
क्यूँ
इतना
ख़ामोश
रहती
हो
ख़ामोशी
आ
बात
करें
किसी
से
कुछ
भी
नहीं
कहती
हो
क्या
ग़म
है
जाने
क्या
क्या
सहती
हो
क्या
बात
है
क्या
छुपा
के
रखती
हो
आओ
कुछ
तो
अस्वात
करें
ख़ामोशी
आ
बात
करें
तुम
क्यूँ
इतना
ख़ामोश
रहती
हो
ख़ामोशी
आ
बात
करें
तुम
भी
हो
तन्हा
हम
भी
हैं
तन्हा
कुछ
तुम
सुनाओ
कुछ
हम
सुनाएँ
रात
को
दिन
दिन
को
रात
करें
चलो
इक
रोज़
मुलाक़ात
करें
ख़ामोशी
आ
बात
करें
तुम
क्यूँ
इतना
ख़ामोश
रहती
हो
ख़ामोशी
आ
बात
करें
- Mohd Afsar
घर
में
भी
दिल
नहीं
लग
रहा
काम
पर
भी
नहीं
जा
रहा
जाने
क्या
ख़ौफ़
है
जो
तुझे
चूम
कर
भी
नहीं
जा
रहा
रात
के
तीन
बजने
को
है
यार
ये
कैसा
महबूब
है
जो
गले
भी
नहीं
लग
रहा
और
घर
भी
नहीं
जा
रहा
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Tehzeeb Hafi
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रात
हो,
चाँद
हो,
बारिश
भी
हो
और
तुम
भी
हो
ऐसा
मुमकिन
ही
नहीं
है
कि
कभी
हो
मिरे
साथ
Faiz Ahmad
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सिगरटें
चाय
धुआँ
रात
गए
तक
बहसें
और
कोई
फूल
सा
आँचल
कहीं
नम
होता
है
Wali Aasi
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तन्हाई
के
हुजूम
में
वो
एक
तेरी
याद
जैसे
अँधेरी
रात
में
जलता
हुआ
दिया
Sagheer Lucky
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नींद
भी
जागती
रही
पूरे
हुए
न
ख़्वाब
भी
सुब्ह
हुई
ज़मीन
पर
रात
ढली
मज़ार
में
Adil Mansuri
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सारी
रात
लगाकर
उसपर
नज़्म
लिखी
और
उसने
बस
अच्छा
लिखकर
भेजा
है
Zahid Bashir
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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तन्हाइयाँ
तुम्हारा
पता
पूछती
रहीं
शब-भर
तुम्हारी
याद
ने
सोने
नहीं
दिया
Unknown
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आज
की
रात
दिवाली
है
दिए
रौशन
हैं
आज
की
रात
ये
लगता
है
मैं
सो
सकता
हूँ
Azm Shakri
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शिकस्ता
दिल
शब-ए-ग़म
दर्द
रुसवाई
अरे
इतना
तो
चलता
है
मुहब्बत
में
Sapna Moolchandani
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उसी
के
इंतिज़ार
में
कटे
भी
पूरी
ज़िंदगी
किसी
ने
इंतिज़ार
करने
को
कहा
है
उम्र
भर
Mohd Afsar
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मैं
याद-ए-रफ़्तगाँ
की
याद
में
बहुत
रोया
तभी
तो
वक़्त-ए-मुलाक़ात
में
बहुत
रोया
Mohd Afsar
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सादगी
नज़र
आई
उसके
लहजे
में
आज
उसने
ऊर्दू
में
बात
की
Mohd Afsar
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कैसी
सूरत
बना
के
बैठा
है
मेरा
महबूब
उसकी
सूरत
पे
फ़िदा
हूँ
मैं
मिरा
क्या
होगा
Mohd Afsar
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अपने
मकान-ए-दिल
में
झाँको
तो
कभी
तुम
कहते
हो
किसको
वहाँ
रहता
है
कौन
Mohd Afsar
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