zakham se dard se raat bhi kaat li | ज़ख़्म से दर्द से रात भी काट ली

  - Maheshwar
ज़ख़्मसेदर्दसेरातभीकाटली
मैंनेफिरजंगकीमातभीकाटली
मुझकोतोजंगकाशौक़हीखागया
मैंनेफिरशौक़कीलातभीकाटली
अढ़रहाथाअनाप्यारमेंहरदफा
मैंनेफिरजिस्मसेजातभीकाटली
रोरहीथीतोफिरचुपकरानेकेलिए
चूमकरदुखभरीबातभीकाटली
अश्क़केभेसमेंमौतजबपड़ा
मैंनेदोज़खमेंवोरातभीकाटली
  - Maheshwar
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