मैंसंग-दिलदम-ब-दमग़ुबार-ए-सितमसेलबरेज़चलरहाहूँ
मगरजहाँमाँकीयादआएवहाँसरासरपिघलरहाहूँ
शिकस्तमिलनेसेहीतोअपनीकहानियाँयादगारहोंगी
शिकस्ता-दिलकोइसीहिकायतसेमैंमह-ओ-सालछलरहाहूँ
दुकानमेंशर्मसारसचपरनज़रनहींडालताहैकोई
इसीलिएतोग़ज़लबनाकरमैंसचकीसूरतबदलरहाहूँ
नहींहैतूफ़ानकीख़तायहकिलौमिरीनातवाँहैइसदम
क़ुबूलियतहैयेहारकीअबमैंआख़िरीबारजलरहाहूँ
बड़ेसलीक़ेसेपारकरताचलूँनदी-वादियाँहज़ारों
मगरतिरीयादकीज़मींपरमैंबे-तहाशाफिसलरहाहूँ
शदीदहोकरसताएँमुझकोसराबकुछमंज़रोंकेतेरे
निकालकरदिलबदनसेतेरीगलीसेजबभीनिकलरहाहूँ