मैं संग-दिल दम-ब-दम ग़ुबार-ए-सितम से लबरेज़ चल रहा हूँ

  - kapil verma
मैंसंग-दिलदम-ब-दमग़ुबार-ए-सितमसेलबरेज़चलरहाहूँ
मगरजहाँमाँकीयादआएवहाँसरासरपिघलरहाहूँ
शिकस्तमिलनेसेहीतोअपनीकहानियाँयादगारहोंगी
शिकस्ता-दिलकोइसीहिकायतसेमैंमह-ओ-सालछलरहाहूँ
दुकानमेंशर्मसारसचपरनज़रनहींडालताहैकोई
इसीलिएतोग़ज़लबनाकरमैंसचकीसूरतबदलरहाहूँ
नहींहैतूफ़ानकीख़तायहकिलौमिरीनातवाँहैइसदम
क़ुबूलियतहैयेहारकीअबमैंआख़िरीबारजलरहाहूँ
बड़ेसलीक़ेसेपारकरताचलूँनदी-वादियाँहज़ारों
मगरतिरीयादकीज़मींपरमैंबे-तहाशाफिसलरहाहूँ
शदीदहोकरसताएँमुझकोसराबकुछमंज़रोंकेतेरे
निकालकरदिलबदनसेतेरीगलीसेजबभीनिकलरहाहूँ
  - kapil verma
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy