ख़ुशी का ज़िक्र राहों में बराए-नाम लगता है

  - kapil verma
ख़ुशीकाज़िक्रराहोंमेंबराए-नामलगताहै
यहाँहैंमरहलेऐसेकिजीनाकामलगताहै
नुमाइशहैयहाँलगतीजमाल-ए-जिस्मकीहर-सू
उताराजिसक़दरइज़्ज़तकोउतनादामलगताहै
अमीरीजोकुचलजाएग़रीबीकोकहींइकरात
सहरकोफिरकिसीमज़दूरपरइल्ज़ामलगताहै
उलझतीसीडगरहैज़िंदगीचलतेहुएजिस
में
निरालाएकपेच-ओ-ख़मयहाँहरगामलगताहै
मिरेदिलकीगलीमेंथाबड़ामशहूरजोइंसान
वहीअबबाम-ए-हाज़िरसेबड़ागुमनामलगताहै
सुनाथादिलसेनिकलेबातजोदिलतकपहुँचतीहै
तोक्यूँरस्मीउसेदिलसेलिखापैग़ामलगताहै
उजालाटिकनहींपातामिरीआँखोंमेंइकपलभी
तिराजलनामुझेशमअअबनाकामलगताहै
मुझेवोदिलनशींउठताहैजबभीछोड़जानेको
धुआँछाताहैफिरदिलकीसड़कपरजामलगताहै
  - kapil verma
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