याद की टीस में जीने के अब तरीक़े मिले हैं कई

  - kapil verma
यादकीटीसमेंजीनेकेअबतरीक़ेमिलेहैंकई
वक़्तकीडोरसेमैंनेभीज़ख़्मदिलकेसिलेहैंकई
ज़िंदगीसेहमेशाअमीरोंकेशिकवे-गिलेहैंकई
सब्रकेफूलग़ुर्बतकीमिट्टीमेंअक्सरखिलेहैंकई
सोहबतेंहैंकईतोहमतेंहैंकईसब्ररखनाज़रा
इसरह-ए-शौक़मेंहरनएरंगकेसिलसिलेहैंकई
काविशोंसेतराशीतिरीराहयेराएगाँतोनहीं
रुकज़रादेखमुड़करभीपीछेतिरेक़ाफ़िलेहैंकई
नक़्श-ए-निय्यतख़ुदअपनाबदलतारहाहूँमसाइलकेसाथ
मुल्क-ए-दिलमेंमिरेमतलबीवहशियोंकेज़िलेहैंकई
  - kapil verma
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy