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100rav
parinda toofaan men ukhde shajar ko dhoondhta hai ab
parinda toofaan men ukhde shajar ko dhoondhta hai ab | परिंदा तूफ़ाँ में उखड़े शजर को ढूँढ़ता है अब,
- 100rav
परिंदा
तूफ़ाँ
में
उखड़े
शजर
को
ढूँढ़ता
है
अब,
हाँ
बेटा
कुछ
दिनों
तक
घर
में
आते
कहता
है
माँ
माँ
- 100rav
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शायद
किसी
बला
का
था
साया
दरख़्त
पर
चिड़ियों
ने
रात
शोर
मचाया
दरख़्त
पर
Abbas Tabish
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यूँँ
नहीं
है
कि
फ़क़त
मैं
ही
उसे
चाहता
हूँ
जो
भी
उस
पेड़
की
छाँव
में
गया
बैठ
गया
Tehzeeb Hafi
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इंसान
को
ही
अक़्ल
ये
आना
तो
है
नहीं
धरती
के
ही
अलावा
ठिकाना
तो
है
नहीं
भर
लो
सिलेंडरों
में
जहाँ
भर
की
ऑक्सीजन
तुमको
मगर
दरख़्त
लगाना
तो
है
नहीं
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Gagan Bajad 'Aafat'
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मुझ
पर
निगाह-ए-नाज़
का
जब
जादू
चल
गया
मैं
रफ़्ता
रफ़्ता
क़ैस
की
सोहबत
में
ढल
गया
ज़ुल्फें
उन्होंने
खोल
के
बिखराई
थी
शजर
फिर
देखते
ही
देखते
मौसम
बदल
गया
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Shajar Abbas
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इसी
से
जान
गया
मैं
कि
बख़्त
ढलने
लगे
मैं
थक
के
छाँव
में
बैठा
तो
पेड़
चलने
लगे
मैं
दे
रहा
था
सहारे
तो
इक
हुजूम
में
था
जो
गिर
पड़ा
तो
सभी
रास्ता
बदलने
लगे
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Farhat Abbas Shah
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मेरे
आँगन
में
एक
बूढ़ा
पेड़
छाँव
भी
देता
है,
दुआएँ
भी
Ankit Maurya
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पेड़
के
काटने
वालों
को
ये
मालूम
तो
था
जिस्म
जल
जाएँगे
जब
सर
पे
न
साया
होगा
Kaifi Azmi
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परिंद
क्यूँँ
मिरी
शाख़ों
से
ख़ौफ़
खाते
हैं
कि
इक
दरख़्त
हूँ
और
साया-दार
मैं
भी
हूँ
Asad Badayuni
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कुछ
भी
नहीं
तो
पेड़
की
तस्वीर
ही
सही
घर
में
थोड़ी
बहुत
तो
हरियाली
चाहिये
Himanshu Kiran Sharma
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ये
रंग
रंग
परिंदे
ही
हम
से
अच्छे
हैं
जो
इक
दरख़्त
पे
रहते
हैं
बेलियों
की
तरह
Khaqan Khavar
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पकड़
कर
छोड़
दो
कुछ
भी
तो
इक
अहसास
रहता
है
तुम्हारा
हाथ
मेरे
हाथ
में
था
देर
तक
यारा
100rav
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आइना
तोड़
दिया
क्या
तुमने,
बेवफ़ाओं
से
तुम्हें
नफ़रत
थी
100rav
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नहीं
हैं
लोग
जो
मौसम
से
आँधी
भाँप
लेते
थे
मिलूँ
हँसते
हुए
तो
यार
मुझको
ख़ुश
समझते
हैं
100rav
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सीखना
है
अब
मुझे
रक़ीब
से
भी
एक
फ़न
कैसे
पाते
हैं
नसीब
में
जो
दूसरे
का
हो
100rav
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बिन
पर
ही
बादलों
में
थे
इक
रोज़
आशिक़ों
में
थे
वो
पेड़
काट
ले
गया,
हम
उलझे
जब
फलों
में
थे
मुस्कान
जल
चुकी
है
अब,
तेज़ाब
आँसुओं
में
थे
चूज़े
बिलों
में
छुप
गए,
जब
साँप
घोसलों
में
थे
काँधे
पे
कैसे
आया
मैं,
जब
दोस्त
बाज़ुओं
में
थे
हम
क़त्ल
भी
किए
गए
शामिल
भी
क़ातिलों
में
थे
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100rav
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