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100rav
bin par hi baadlon men the
bin par hi baadlon men the | बिन पर ही बादलों में थे
- 100rav
बिन
पर
ही
बादलों
में
थे
इक
रोज़
आशिक़ों
में
थे
वो
पेड़
काट
ले
गया,
हम
उलझे
जब
फलों
में
थे
मुस्कान
जल
चुकी
है
अब,
तेज़ाब
आँसुओं
में
थे
चूज़े
बिलों
में
छुप
गए,
जब
साँप
घोसलों
में
थे
काँधे
पे
कैसे
आया
मैं,
जब
दोस्त
बाज़ुओं
में
थे
हम
क़त्ल
भी
किए
गए
शामिल
भी
क़ातिलों
में
थे
- 100rav
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उड़
गए
सारे
परिंदे
मौसमों
की
चाह
में
इंतिज़ार
उन
का
मगर
बूढे
शजर
करते
रहे
Ambreen Haseeb Ambar
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हमारा
इश्क़
इबादत
का
अगला
दर्जा
है
ख़ुदा
ने
छोड़
दिया
तो
तुम्हारा
नाम
लिया
ग़मों
से
बैर
था
सो
हमने
ख़ुद-कुशी
कर
ली
शजर
ने
गिर
के
परिंदों
से
इन्तेक़ाम
लिया
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Balmohan Pandey
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इक
मुहब्बत
से
भरी
उस
ज़िंदगी
के
ख़्वाब
हैं
पेड़
दरिया
और
पंछी
तेरे
मेरे
ख़्वाब
हैं
Neeraj Nainkwal
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परिंद
क्यूँँ
मिरी
शाख़ों
से
ख़ौफ़
खाते
हैं
कि
इक
दरख़्त
हूँ
और
साया-दार
मैं
भी
हूँ
Asad Badayuni
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जिसे
तुम
काट
आए
उस
शजर
को
ढूँढता
होगा
परिंदा
लौटकर
के
अपने
घर
को
ढूँढता
होगा
Bhaskar Shukla
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लो
चाँद
हो
गया
नमू
माह-ए-ख़राम
का
ऐ
मोमिनों
लिबास-ए-सियाह
ज़ेब-ए-तन
करो
फ़र्श-ए-अज़ा
बिछा
के
अज़ाख़ाने
में
शजर
अब
सुब्ह-ओ-शाम
ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन
करो
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Shajar Abbas
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धूप
तो
धूप
ही
है
इसकी
शिकायत
कैसी
अब
की
बरसात
में
कुछ
पेड़
लगाना
साहब
Nida Fazli
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यूँँ
नहीं
है
कि
फ़क़त
मैं
ही
उसे
चाहता
हूँ
जो
भी
उस
पेड़
की
छाँव
में
गया
बैठ
गया
Tehzeeb Hafi
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वो
पेड़
जिस
की
छाँव
में
कटी
थी
उम्र
गाँव
में
मैं
चूम
चूम
थक
गया
मगर
ये
दिल
भरा
नहीं
Hammad Niyazi
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खड़े
होकर
कहा
ये
आइने
के
रु-बा-रु
मैंने
शजर
तुमको
कहीं
मिल
जाए
मुझको
इत्तिला
करना
Shajar Abbas
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पूछता
घर
है
अब
पैसे
हैं
काम
था
ये
नहीं
पूछता
कोई
तू
ठीक
है
100rav
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मुहब्बत
मुझ
सेे
और
चिट्ठी
किसी
और
से
तुझे
आती
है
अब
हिचकी
किसी
और
से
मेरे
हिस्से
में
दिन
और
रात
उसके
साथ
ली
सब्ज़ी
मुझ
सेे
और
रोटी
किसी
और
से
किसी
और
से
मुहब्बत
करते
हैं
जब
लोग
तो
क्यूँ
कर
लेते
हैं
शादी
किसी
और
से
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100rav
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बुराई
देश
की
कर
लेते
हैं
इस
देश
में
रहकर
बताए
इतनी
आज़ादी
भला
किस
देश
ने
दी
है
100rav
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ज़ियादा
देर
कर
दी
आपने
जानाँ
चढ़ा
दो
फूल
अब
आ
ही
गई
हो
तो
100rav
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किसी
को
चाहना
फिर
चाहना
वो
भी
तुम्हें
चाहे,
तो
भाई
तुम
मुहब्बत
थोड़ी
सौदा
चाहते
हो
बस
100rav
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