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100rav
nazar utaarna agar hai vaham in badon ka to
nazar utaarna agar hai vaham in badon ka to | नज़र उतारना अगर है वहम इन बड़ों का तो,
- 100rav
नज़र
उतारना
अगर
है
वहम
इन
बड़ों
का
तो,
नज़र
उतारते
ही
बच्चे
शाँत
क्यूँ
हो
जाते
हैं
- 100rav
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आँख
की
बेबसी
दिल
का
डर
देखना
तुम
किसी
दिन
ग़रीबों
का
घर
देखना
Alankrat Srivastava
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लग
गई
मुझको
नज़र
बेशक़
तुम्हारी
आईनों
मैं
बहुत
ख़ुश
था
किसी
इक
सिलसिले
से
उन
दिनों
Aarush Sarkaar
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यूँँ
तो
वो
शख़्स
बिलकुल
बे-गुनह
है
ज़माने
की
मगर
उस
पे
निगह
है
हमारे
दरमियाँ
जो
दूरियाँ
हैं
यक़ीनन
तीसरी
कोई
वजह
है
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Dileep Kumar
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भटकती
फिर
रही
है
आँख
घर
में
तिरी
आवाज़
इसको
दिख
रही
है
Himanshu Kiran Sharma
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नज़र
में
रखना
कहीं
कोई
ग़म
शनास
गाहक
मुझे
सुख़न
बेचना
है
ख़र्चा
निकालना
है
Umair Najmi
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तुम्हें
ज़रूर
कोई
चाहतों
से
देखेगा
मगर
वो
आँखें
हमारी
कहाँ
से
लाएगा
तुम्हारे
साथ
ये
मौसम
फ़रिश्तों
जैसा
है
तुम्हारे
बा'द
ये
मौसम
बहुत
सताएगा
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Bashir Badr
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भीगी
पलकें
देख
कर
तू
क्यूँँ
रुका
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
तो
मेरी
आँख
में
कुछ
आ
गया
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आकर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
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Zubair Ali Tabish
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सौ
सौ
उमीदें
बँधती
है
इक
इक
निगाह
पर
मुझ
को
न
ऐसे
प्यार
से
देखा
करे
कोई
Allama Iqbal
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लाई
न
ऐसों-वैसों
को
ख़ातिर
में
आज
तक
ऊँची
है
किस
क़दर
तिरी
नीची
निगाह
भी
Firaq Gorakhpuri
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पुतलियाँ
तक
भी
तो
फिर
जाती
हैं
देखो
दम-ए-नज़अ
वक़्त
पड़ता
है
तो
सब
आँख
चुरा
जाते
हैं
Ameer Minai
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इस
क़दर
ग़म
मुझे
रुलाता
था
दोस्त
मनहूस
मानते
थे
तब
100rav
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आबरू
ये
ख़्वारी
का
ही
जाल
है
कमाल
है
अच्छे
शाइरों
का
जब
ये
हाल
है
कमाल
है
सोचा
था
सिखाने
वाला
है
सिखाएगा
कभी
लोमड़ी
पे
शे'र
का
ये
खाल
है
कमाल
है
मैंने
भी
निभाया
क़ाफ़िया
रदीफ़
बहर
अब
कहना
मत
कि
ये
भी
इक
ख़याल
है
कमाल
है
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न
ख़ुद
को
बेसबब
तकलीफ़
दूँगा
करूँँगा
ये
तो
कब
तकलीफ़
दूँगा
मेरा
तो
काम
है
तकलीफ़
देना
ख़ुदी
को
बे-अदब
तकलीफ़
दूँगा
मैं
अब
ऐसे
उसे
तकलीफ़
दूँगा
न
कोई
और
अब
तकलीफ़
दूँगा
तू
कहना
क्यूँ
नहीं
तकलीफ़
देते
न
कहके
कुछ
ग़ज़ब
तकलीफ़
दूँगा
बता
तकलीफ़
अब
कैसे
मिटाऊँ
तुझे
ये
कहके
रब
तकलीफ़
दूँगा
तभी
आना
मेरी
तकलीफ़
लेने
जनाज़े
में
हाँ
सब
तकलीफ़
दूँगा
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हाँ
मेरी
आँख
में
भी
इक
समुंदर
है
नहीं
रुकते
ये
आँसू
जब
लगे
बहने
100rav
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मुहब्बत
पानी
है
तो
बेहया
बन
यहाँ
अब
कौन
माथा
चूमता
है
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