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100rav
na KHud ko besabab takleef dooñga
na KHud ko besabab takleef dooñga | न ख़ुद को बेसबब तकलीफ़ दूँगा
- 100rav
न
ख़ुद
को
बेसबब
तकलीफ़
दूँगा
करूँँगा
ये
तो
कब
तकलीफ़
दूँगा
मेरा
तो
काम
है
तकलीफ़
देना
ख़ुदी
को
बे-अदब
तकलीफ़
दूँगा
मैं
अब
ऐसे
उसे
तकलीफ़
दूँगा
न
कोई
और
अब
तकलीफ़
दूँगा
तू
कहना
क्यूँ
नहीं
तकलीफ़
देते
न
कहके
कुछ
ग़ज़ब
तकलीफ़
दूँगा
बता
तकलीफ़
अब
कैसे
मिटाऊँ
तुझे
ये
कहके
रब
तकलीफ़
दूँगा
तभी
आना
मेरी
तकलीफ़
लेने
जनाज़े
में
हाँ
सब
तकलीफ़
दूँगा
- 100rav
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मैं
हो
गया
हूँ
क़ैद
हज़ारों
रिवाज़
में
मुझको
मेरी
ही
ज़ात
ने
फलने
नहीं
दिया
shaan manral
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दिन
रात
मय-कदे
में
गुज़रती
थी
ज़िंदगी
'अख़्तर'
वो
बे-ख़ुदी
के
ज़माने
किधर
गए
Akhtar Shirani
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बे-ख़ुदी
में
ले
लिया
बोसा
ख़ता
कीजे
मुआ'फ़
ये
दिल-ए-बेताब
की
सारी
ख़ता
थी
मैं
न
था
Bahadur Shah Zafar
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ज़िंदगी
कहते
हैं
जिस
को
चार
दिन
की
बात
है
बस
हमेशा
रहने
वाली
इक
ख़ुदा
की
ज़ात
है
Unknown
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ये
हुनर
रब
ने
मेरी
ज़ात
में
रक्खा
हुआ
है
अच्छे
अच्छो
को
भी
औक़ात
में
रक्खा
हुआ
है
Fareeha Naqvi
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ख़ुदी
को
कर
बुलंद
इतना
कि
हर
तक़दीर
से
पहले
ख़ुदा
बंदे
से
ख़ुद
पूछे
बता
तेरी
रज़ा
क्या
है
Allama Iqbal
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ज़हीफ़ी
इस
लिए
मुझको
सुहानी
लग
रही
है
इसे
कमाने
में
पूरी
जवानी
लग
रही
है
नतीजा
ये
है
कि
बरसों
तलाश-ए-ज़ात
के
बाद
वहाँ
खड़ा
हूँ
जहाँ
रेत
पानी
लग
रही
है
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Khalid Sajjad
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दौलतें
मुद्दा
बनीं
या
ज़ात
आड़े
आ
गई
इश्क़
में
कोई
न
कोई
बात
आड़े
आ
गई
Baghi Vikas
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हस्ती
का
नज़ारा
क्या
कहिए
मरता
है
कोई
जीता
है
कोई
जैसे
कि
दिवाली
हो
कि
दिया
जलता
जाए
बुझता
जाए
Nushur Wahidi
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उसे
तो
दौलत-ए-दुनिया
भी
कम
भी
पाने
को
मिरी
तो
ज़ात
का
मीज़ान
भी
ज़ियादा
नहीं
Vipul Kumar
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कहीं
दिखती
नहीं
उसकी
मुहब्बत
हवा
दिखती
नहीं
पर
है
जहाँ
में
100rav
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उस
सेे
मिला
तो
जाना
ये
दुनिया
बहुत
ही
छोटी
है
100rav
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नहीं
आए
ज़रूरत
में
सख़ा
मेरे
बुलाने
पर,
सभी
रोए
वहीं
लेकिन
बदन
मेरा
जलाने
पर
100rav
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क्या
भरेगा
यार
बारिश
भी
समुंदर
हक़
में
होता
तेरे
ग़म
भी
मैं
ले
लेता
100rav
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आजकल
जब
देखता
हूँ
कोई
लड़की
ख़ूब-सूरत
सोचता
हूँ
ख़ूब-सूरत
तो
है
उस
जैसी
नहीं
है
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