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100rav
haal usne jo meraa ik baar poocha
haal usne jo meraa ik baar poocha | हाल उसने जो मेरा इक बार पूछा
- 100rav
हाल
उसने
जो
मेरा
इक
बार
पूछा
डॉक्टर
मुझ
सेे
दवाई
पूछता
है
- 100rav
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बीमार
को
मरज़
की
दवा
देनी
चाहिए
मैं
पीना
चाहता
हूँ
पिला
देनी
चाहिए
Rahat Indori
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इश्क़
से
तबीअत
ने
ज़ीस्त
का
मज़ा
पाया
दर्द
की
दवा
पाई
दर्द-ए-बे-दवा
पाया
Mirza Ghalib
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हमको
हकीम
ने
ही
किया
ठीक
दोस्तों
हम
पर
किसी
के
लम्स
ने
जादू
नहीं
किया
Tanoj Dadhich
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दर्द
मिन्नत-कश-ए-दवा
न
हुआ
मैं
न
अच्छा
हुआ
बुरा
न
हुआ
Mirza Ghalib
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हाँ
ठीक
है
मैं
अपनी
अना
का
मरीज़
हूँ
आख़िर
मिरे
मिज़ाज
में
क्यूँँ
दख़्ल
दे
कोई
Jaun Elia
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इस
मरज़
से
कोई
बचा
भी
है
चारा-गर
इश्क़
की
दवा
भी
है
Unknown
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गोया
तुम्हारी
याद
ही
मेरा
इलाज
है
होता
है
पहरों
ज़िक्र
तुम्हारा
तबीब
से
Agha Hashr Kashmiri
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चारागरी
की
बात
किसी
और
से
करो
अब
हो
गए
हैं
यारो
पुराने
मरीज़
हम
Shuja Khawar
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ग़म-ए-हयात
में
यूँँ
ढह
गया
नसीब
का
घर
कि
जैसे
बाढ़
में
डूबा
हुआ
गरीब
का
घर
वबायें
आती
गईं
और
लोग
मरते
गए
हमारे
गाँव
में
था
ही
नहीं
तबीब
का
घर
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Ashraf Ali
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कभी
हँसता
हूँ
तो
आँखें
कभी
मैं
नम
भी
रखता
हूँ
हर
इक
मुस्कान
के
पीछे
हज़ारों
ग़म
भी
रखता
हूँ
शिफ़ा
भी
दे
नहीं
सकता
मुझे
कोई
मेरा
अपना
नतीजन
मैं
मिरे
ज़ख़्मों
का
ख़ुद
मरहम
भी
रखता
हूँ
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Shubham Dwivedi
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तुझको
ख़ुदा
क़तरा
है
वो
मुझको
मगर
दरिया
है
वो
करता
भला
सजदा
न
क्यूँ
मेरे
लिए
का'बा
है
वो
तू
रहम
कर
आँसू
पे
कुछ
अब
भी
नहीं
मेरा
है
वो
उसको
ग़लत-फ़हमी
है
ये
मेरा
नहीं
उसका
है
वो
बतलाए
कोई
सच
उसे
मैं
इश्क़
तो
फ़ित्ना
है
वो
इक
रोज़
जानेगी
तू
भी
अंजाम
मैं
वक़्फ़ा
है
वो
खो
दोगी
तो
तड़पोगी
तुम
सौरभ
भी
हाँ
ख़ाका
है
वो
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मुहब्बत
मुझ
सेे
और
चिट्ठी
किसी
और
से
तुझे
आती
है
अब
हिचकी
किसी
और
से
मेरे
हिस्से
में
दिन
और
रात
उसके
साथ
ली
सब्ज़ी
मुझ
सेे
और
रोटी
किसी
और
से
किसी
और
से
मुहब्बत
करते
हैं
जब
लोग
तो
क्यूँ
कर
लेते
हैं
शादी
किसी
और
से
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मेरा
ख़्वाब
ख़्वाबी
नहीं
है
हाँ
तू
अब
निसाबी
नहीं
है
तुझे
कल
दिए
थे
जो
भी
फूल
बता
क्यूँ
गुलाबी
नहीं
है
ख़ुदा
रहम
वो
बे-वफ़ा
है
कोई
और
ख़राबी
नहीं
है
तू
आ
खोल
क़िस्मत
का
ताला
ये
मत
कह
कि
चाबी
नहीं
है
बता
क़र्ज़
में
क्यूँ
है
तू
जब
जुआरी
शराबी
नहीं
है
मेरे
शे'र
पे
वाह
तो
कर
मेरे
हैं
किताबी
नहीं
है
नमीं
है
जो
लफ़्ज़ों
में
मेरे
ये
आँसू
है
आबी
नहीं
है
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हज़ारों
साल
पहले
वाले
डायर
वुल्फ़
लाए
हो
बताओ
आशिक़ों
को
पहले
जैसा
कब
बनाओगे
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मैं
जूते
घिसके
पहुँचा
जैसे
तैसे
तो
जूते
चाटने
वाले
मिले
सब
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