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100rav
mera khwaab khwaabi nahin hai
मेरा ख़्वाब ख़्वाबी नहीं है
- 100rav
मेरा
ख़्वाब
ख़्वाबी
नहीं
है
हाँ
तू
अब
निसाबी
नहीं
है
तुझे
कल
दिए
थे
जो
भी
फूल
बता
क्यूँ
गुलाबी
नहीं
है
ख़ुदा
रहम
वो
बे-वफ़ा
है
कोई
और
ख़राबी
नहीं
है
तू
आ
खोल
क़िस्मत
का
ताला
ये
मत
कह
कि
चाबी
नहीं
है
बता
क़र्ज़
में
क्यूँ
है
तू
जब
जुआरी
शराबी
नहीं
है
मेरे
शे'र
पे
वाह
तो
कर
मेरे
हैं
किताबी
नहीं
है
नमीं
है
जो
लफ़्ज़ों
में
मेरे
ये
आँसू
है
आबी
नहीं
है
- 100rav
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क्या
भरेगा
यार
बारिश
भी
समुंदर
हक़
में
होता
तेरे
ग़म
भी
मैं
ले
लेता
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ऐसे
मैंने
दोस्तों
की
रख
लीं
आन
बान
हाँ
बोला
दोस्ती
हुई
थी
दुश्मनी
के
बाद
में
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ग़ैरों
से
मिलते
रहने
पर
वो
ग़ैर
अपने
हो
गए
अपनों
से
जो
मिलने
लगे
बू
ग़ैर
की
आने
लगी
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मुहब्बत
मुझ
सेे
और
चिट्ठी
किसी
और
से
तुझे
आती
है
अब
हिचकी
किसी
और
से
मेरे
हिस्से
में
दिन
और
रात
उसके
साथ
ली
सब्ज़ी
मुझ
सेे
और
रोटी
किसी
और
से
किसी
और
से
मुहब्बत
करते
हैं
जब
लोग
तो
क्यूँ
कर
लेते
हैं
शादी
किसी
और
से
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चुराया
चोर
ने
ज़ेवर
समझ
कर
जो
तिजोरी
से
तेरे
कपड़े
तेरी
यादें
तेरे
ख़त
ले
गया
है
वो
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