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Zia Mazkoor
jagah jagah na taalluq KHaraab kar meraa
jagah jagah na taalluq KHaraab kar meraa | जगह जगह न त'अल्लुक़ ख़राब कर मेरा
- Zia Mazkoor
जगह
जगह
न
त'अल्लुक़
ख़राब
कर
मेरा
तेरे
लिए
तो
किसी
से
भी
लड़
पड़ूँगा
मैं
- Zia Mazkoor
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मंज़िल
मिली
तो
उसकी
कमी
हमको
खा
गई
सामान
रास्ते
में
जो
खोना
पड़ा
हमें
Abbas Qamar
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तेग़-बाज़ी
का
शौक़
अपनी
जगह
आप
तो
क़त्ल-ए-आम
कर
रहे
हैं
Jaun Elia
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ज़िन्दगी,
यूँँ
भी
गुज़ारी
जा
रही
है
जैसे,
कोई
जंग
हारी
जा
रही
है
जिस
जगह
पहले
से
ज़ख़्मों
के
निशां
थे
फिर
वहीं
पे
चोट
मारी
जा
रही
है
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Azm Shakri
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चले
चलिए
कि
चलना
ही
दलील-ए-कामरानी
है
जो
थक
कर
बैठ
जाते
हैं
वो
मंज़िल
पा
नहीं
सकते
Hafeez Banarasi
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किसी
के
दिल
में
जगह
किस
तरह
बनानी
है
ये
सीखने
की
हो
चाहत
हमारे
शे'र
सुनो
Kashif Adeeb Makanpuri
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बुरी
सरिश्त
न
बदली
जगह
बदलने
से
चमन
में
आ
के
भी
काँटा
गुलाब
हो
न
सका
Arzoo Lakhnavi
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सब
कर
लेना
लम्हे
ज़ाया'
मत
करना
ग़लत
जगह
पर
जज़्बे
ज़ाया'
मत
करना
Ali Zaryoun
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मेरा
भी
एक
बाप
था
अच्छा
सा
एक
बाप
वो
जिस
जगह
पहुँच
के
मरा
था
वहीं
हूँ
मैं
Rais Farog
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अपनी
मंज़िल
पे
पहुँचना
भी
खड़े
रहना
भी
कितना
मुश्किल
है
बड़े
हो
के
बड़े
रहना
भी
Shakeel Azmi
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ज़िंदगी
फ़िरदौस-ए-गुम-गश्ता
को
पा
सकती
नहीं
मौत
ही
आती
है
ये
मंज़िल
दिखाने
के
लिए
Hafeez Jalandhari
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अजीब
हादसा
हुआ
अजीब
सानेहा
हुआ
मैं
ज़िन्दगी
की
शाख
से
हरा
भरा
जुदा
हुआ
वो
खद्दोखाल
देख
कर
सभी
के
होश
उड़
गए
नहीं
के
सिर्फ़
आईना
हवा
से
वाख़्ता
हुआ
हवा
चली
तो
उसकी
शाल
मेरी
छत
पे
आ
गिरी
ये
उस
बदन
के
साथ
मेरा
पहला
राब़्ता
हुआ
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Zia Mazkoor
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हवा
चली
तो
उसकी
शॉल
मेरी
छत
पे
आ
गिरी
ये
उस
बदन
के
साथ
मेरा
पहला
राब्ता
हुआ
Zia Mazkoor
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ख़ुदा
का
शुक्र
मेरा
ठेकेदार
अच्छा
है
वगरना
कौन
ज़हीफों
से
काम
लेता
है
मिशाल
खान
तेरी
उंगलियां
नहीं
टूटी
हमारी
माओं
के
होटों
का
लम्स
टूटा
है
मैं
उस
हथेली
पे
रौशन
हुआ
,
उसके
बाद
वही
हुआ
जो
चिराग़ों
के
साथ
होता
है
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Zia Mazkoor
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दौलत
शोहरत
बीवी
बच्चे
अच्छा
घर
और
अच्छे
दोस्त
कुछ
तो
है
जो
इन
के
बाद
भी
हासिल
करना
बाक़ी
है
कभी-कभी
तो
दिल
करता
है
चलती
रेल
से
कूद
पड़ूॅं
फिर
कहता
हूॅं
पागल
अब
तो
थोड़ा
रस्ता
बाक़ी
है
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Zia Mazkoor
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आपका
काम
हो
गया
साहब
लाश
दरिया
में
फेंक
दी
मैंने
Zia Mazkoor
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