yaar keechad men videshi phool kyuuñ ham bo rahe | यार कीचड़ में विदेशी फूल क्यूँ हम बो रहे

  - Tarun Pandey
यारकीचड़मेंविदेशीफूलक्यूँहमबोरहे
ख़ार-ओ-ख़समेंभीबहुतकुछहैजिसेहमखोरहे
जबतलककार-ए-जहाँकोजानपातेहमसभी
देखतेहैंक्याकिबोझादूसरोंकाढोरहे
बसदिखावेकेलिएकुछलोगलगतेहैंगले
बे-बसीरतलोगहाथोंमेंतमंचाबोरहे
बैठकरदफ़्तरमेंआँखेंमूँदलींबार-ए-दिगर
जबहुआहल्लाकिमुफ़्लिसहकदुबाराखोरहे
दिलमेंमेरेचुभगईंकितनेग़मोंकीकिर्चियाँ
कुछग़मोंपरहँसरहेहैंकुछग़मोंपररोरहे
  - Tarun Pandey
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