यारकीचड़मेंविदेशीफूलक्यूँहमबोरहे
ख़ार-ओ-ख़समेंभीबहुतकुछहैजिसेहमखोरहे
जबतलककार-ए-जहाँकोजानपातेहमसभी
देखतेहैंक्याकिबोझादूसरोंकाढोरहे
बसदिखावेकेलिएकुछलोगलगतेहैंगले
बे-बसीरतलोगहाथोंमेंतमंचाबोरहे
बैठकरदफ़्तरमेंआँखेंमूँदलींबार-ए-दिगर
जबहुआहल्लाकिमुफ़्लिसहकदुबाराखोरहे
दिलमेंमेरेचुभगईंकितनेग़मोंकीकिर्चियाँ
कुछग़मोंपरहँसरहेहैंकुछग़मोंपररोरहे