जवानीकेदिनोंमेंप्यारपरक़ुर्बान,मैंऔरतुम
कभीमेरीसभीनज़्मोंके'थेउनवान,मैंऔरतुम
समुंदरऔरतलातुमजैसाहीथासाथदोनोंका
सुनामीथीमुक़द्दरमेंमगरअंजान,मैंऔरतुम
छतोंपरबैठकरक्यूँचाँदकोतकनामिरेदिलबर
अरेकिसपरथा'येचंदाकहोक़ुर्बान,मैंऔरतुम
कभीमुझसेेघड़ीभरबातकरनेकोतड़पतीथी
कभीथेप्यारमेंदोजिस्मऔरयक-जान,मैंऔरतुम
नज़रसेहीगिरानाथामुझेतुमको,तुम्हेंमुझको
जवानीकेदिनोंमेंथेबड़ेनादान,मैंऔरतुम