gahri raat hai aur toofaan ka shor bahut | गहरी रात है और तूफ़ान का शोर बहुत

  - Zeb Ghauri
गहरीरातहैऔरतूफ़ानकाशोरबहुत
घरकेदर-ओ-दीवारभीहैंकमज़ोरबहुत
तेरेसामनेआतेहुएघबराताहूँ
लबपेतिराइक़रारहैदिलमेंचोरबहुत
नक़्शकोईबाक़ीरहजाएमुश्किलहै
आजलहूकीरवानीमेंहैज़ोरबहुत
दिलकेकिसीकोनेमेंपड़ेहोंगेअबभी
एकखुलाआकाशपतंगेंडोरबहुत
मुझसेबिछड़करहोगासमुंदरभीबेचैन
रातढलेतोकरताहोगाशोरबहुत
केकभीवीरानी-ए-दिलकातमाशाकर
इसजंगलमेंनाचरहेहैंमोरबहुत
अपनेबसेरेपंछीलौटपाया'ज़ेब'
शामघटाभीउट्ठीथीघनघोरबहुत
  - Zeb Ghauri
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy