haqeeqaton ko fasana nahin banaati main | हक़ीक़तों को फ़साना नहीं बनाती मैं

  - Zahraa Qarar
हक़ीक़तोंकोफ़सानानहींबनातीमैं
तुम्हारेख़्वाबसेख़ुदकोनहींजगातीमैं
वोफ़ाख़्ताकीअलामतअगरसमझजाता
तोउसकेसामनेतलवारक्यूँँउठातीमैं
जनाबवाक़ईमैंनेकहींनहींजाना
वगर्नाआपकीगाड़ीमेंबैठजातीमैं
फिरएक-दममिरेपैरोंमेंगिरगएकुछलोग
क़रीबथाकिकोईफ़ैसलासुनातीमैं
ख़ुदाकाशुक्रकिवोरास्तेसेलौटगया
अगरवोआतातोउसकोकहाँबिठातीमैं
किसीख़यालमेंहाथोंसेछूटजातेहैं
येजान-बूझकेबर्तननहींगिरातीमैं
वोदिलहोयामिरीगुड़ियाकीमौतहोजोहो
हमेशासोगमेंचूल्हानहींजलातीमैं
मैंमानतीहूँमिराफ़ैसलाग़लतनिकला
तुम्हींबताओकिपहलेकिसेबचातीमैं
मिराबदनकिसीतितलीसेकमनहीं'ज़हरा'
तोमरजातीअगरतेरेहाथआतीमैं
  - Zahraa Qarar
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