इन्हीसूखेहुएमैदानोंमें
अबजहाँधूपकीलहरोंकेसिवाकुछभीनहीं
सब्ज़लहरातेहुएखेतहुआकरतेथे
लोगआबादथेपेड़ोंकीघनीछाँवमें
महफ़िलेंजमतीथींअफ़्सानेसुनेजातेथे
आजवीरानमकानोंमेंहवाचीख़तीहै
धूलमेंउड़तेकिताबोंकेवरक़
किसकीयादोंकेवरक़किसकेख़यालोंकेवरक़
मुझसेकहतेहैंकिरहजाओयहीं
औरमैंसोचताहूँसिर्फ़अँधेराहैयहाँ
फिरहवाआतीहैदीवानीहवा
औरकहतीहै:नहींसिर्फ़अँधेरातोनहीं
यादहैंमुझकोवोलम्हेजिनमें
लोगआज़ादथेऔरज़िंदाथे
आओमैंतुमकोदिखाऊँवोमक़ाम.....
एकवीरानजगहईंटोंकाअम्बारनहींकुछभीनहीं
औरवोकहतीहैयेप्यारकामरकज़थाकभी
किसकीयादआएमुझेकिसकीबताओकिसकी!
औरअबचुपहैहवाचुपहैज़मीं
बोलऐवक़्त!कहाँहैंवोलोग
जिनकोवोयादहैंजिनकीयादें
इनहवाओंमेंपरेशानहैंआज