main ne logon se bhala kya seekha | मैं ने लोगों से भला क्या सीखा

  - Zahid Dar
मैंनेलोगोंसेभलाक्यासीखा
यहीअल्फ़ाज़मेंझूटीसच्ची
बातसेबातमिलानादिलकी
बे-यक़ीनीकोछुपानासरको
हरग़बीकुंद-ज़ेहनशख़्सकीख़िदमतमेंझुकानाहँसना
मुस्कुरातेहुएकहनासाहब
ज़िंदगीकरनेकाफ़नआपसेबेहतरतोयहाँकोईनहींजानताहै
गुफ़्तुगूकितनीभीमजहूलहोमाथाहमवार
कानबेदाररहेंआँखेंनिहायतगहरी
सोचमेंडूबीहुई
फ़लसफ़ीऐसेकिताबीयाज़बानीमानो
उससेपहलेकभीइंसाननेदेखेनेसुने
उनकोबतलादोयहीबातवगर्नाइकदिन
रूहदिनभीबहुतदूरनहीं
तुमनहींआओगेयेलोगकहेंगेजाहिल
बातकरनेकासलीक़ाहीनहींजानताहै
क्यातुम्हेंख़ौफ़नहींआताहै
ख़ौफ़आताहैकिलोगोंकीनज़रसेगिरकर
हाज़रादौरमेंइकशख़्सजिएतोकैसे
शहरमेंलाखोंकीआबादीमें
एकभीऐसानहीं
जिसकाईमानकिसीऐसेवजूद
ऐसीहस्तीयाहक़ीक़तयाहिकायतपरहो
जिसतक
हाज़रादौरकेजिब्रईलकीया'नीअख़बार
दस्तरसहोरसाईहो
मैंनेलोगोंसेभलाक्यासीखा
बुज़दिलीऔरजहालतकीफ़ज़ामेंजीना
दाइमीख़ौफ़मेंरहनाकहना
सबबराबरहैंहुजूम
जिसतरफ़जाएवहीरस्ताहै
मैंनेलोगोंसेभलाक्यासीखा
  - Zahid Dar
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