ghairat hai ki haya | ग़ैरत है कि हया

  - Zaheer Siddiqui
ग़ैरतहैकिहया
नामउसकालियाजिसकोपुकाराउसने
उसगईरातकेसन्नाटेमेंकौनआयाहै
बंददरवाज़ेकेमजसमेंतोसीताहीहै
औरबाहर
कोईरावनतोनहीं
कौनहैकौनकीसहमीसीसदा
वोभीकुछकहसकामैंकेसिवा
दस्तकेंरामकेमख़्सूसज़बाँरखतीहैं
गोश-ए-सीताकेलिएमुज़्दा-ए-जाँरखतीहैं
बल्बरौशनहुआऔरचापक़दमकीउभरी
चूड़ियाँबोलउठीं
उँगलियाँकाठकीमिज़राबपेफिररेंगगईं
दोनोंपटख़्वाबसेचौंकेतोमअ'नचीख़उठे
एकहंगामाहुआरातकाअफ़्सूँटूटा
मुंतज़रसाया-ए-ख़जालतकेधुआँसेउभरा
रातकाफ़ीहुईतुमजागरहीहोअबतक
आजफिरदेरहुई
असलमेंआजअजबबातहुई
ठीकहैठीककोईबातनहीं
मुंतज़िरशाख़जोलचकीतोकईफूलझड़े
आपमुँहहाथतोधोलेंपहले
औरमिंटोंमेंमैंसालकोज़रागर्मकरूँँ
प्यारकीआगभीरौशनहुईस्टोवकेसाथ
दश्त-ए-तन्हाईकेइफ़रीतबहुतदूरहुए
वसवसेजितनेथेदिलमेंसभीकाफ़ूरहुए
हरकतऔरहरारतमेंमगनदोनोंबदन
येकिरायाकामकाँहैकिमोहब्बतकाचमन
एकएकलुक़्मापेहोतीहैंनिगाहेंदो-चार
एकएकजुरएमेंमहलूलतबस्सुमकीबहार
मुज़्तरिबदिलमेंमुनव्वरहैंमसर्रतकेचराग़
जानी-पहचानीसीख़ुश्बूमेंहैमसहूर-ए-दिमाग़
आँखोंआँखोंमेंसियहरातकटेगीअबतो
होंटसेहोंटकीसौग़ातबटेगीअबतो
  - Zaheer Siddiqui
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