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Zeeshan kaavish
unki aankhoñ se jab se pee yaaro
unki aankhoñ se jab se pee yaaro | उनकी आँखों से जब से पी यारो
- Zeeshan kaavish
उनकी
आँखों
से
जब
से
पी
यारो
छोड़
दी
तब
से
मय-कशी
यारो
रात
को
छत
से
चाँद
जब
देखा
याद
उनकी
फिर
आ
गई
यारो
- Zeeshan kaavish
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ज़रूरत
सब
कराती
है
मोहब्बत
भी
इबादत
भी
नहीं
तो
कौन
बेमतलब
किसी
को
याद
करता
है
Umesh Maurya
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जाते
जाते
आप
इतना
काम
तो
कीजे
मिरा
याद
का
सारा
सर-ओ-सामाँ
जलाते
जाइए
Jaun Elia
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आज
फिर
नींद
को
आँखों
से
बिछड़ते
देखा
आज
फिर
याद
कोई
चोट
पुरानी
आई
Iqbal Ashhar
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आज
फिर
चाय
बनाते
हुए
वो
याद
आया
आज
फिर
चाय
में
पत्ती
नहीं
डाली
मैं
ने
Taruna Mishra
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इस
ज़िन्दगी
में
इतनी
फ़राग़त
किसे
नसीब
इतना
न
याद
आ
कि
तुझे
भूल
जाएँ
हम
Ahmad Faraz
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तुमने
किया
न
याद
कभी
भूल
कर
हमें
हमने
तुम्हारी
याद
में
सब
कुछ
भुला
दिया
Bahadur Shah Zafar
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आख़िरी
बार
मैं
कब
उस
से
मिला
याद
नहीं
बस
यही
याद
है
इक
शाम
बहुत
भारी
थी
Hammad Niyazi
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जब
भी
कोई
मंज़िल
हासिल
करता
हूँ
याद
बहुत
आती
हैं
तेरी
ता'रीफ़ें
Tanoj Dadhich
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मैं
इस
ख़याल
से
शर्मिंदगी
में
डूब
गया
कि
मेरे
होते
हुए
वो
नदी
में
डूब
गया
Siraj Faisal Khan
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किस
मुँह
से
करें
उन
के
तग़ाफ़ुल
की
शिकायत
ख़ुद
हम
को
मोहब्बत
का
सबक़
याद
नहीं
है
Hafeez Banarasi
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तेरी
यादों
से
गुज़रने
के
लिए
ज़िंदा
रहता
हूँ
मैं
मरने
के
लिए
Zeeshan kaavish
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वो
मुहब्बत
का
तलबगार
नहीं
हो
सकता
जो
सितमगर
है
उसे
प्यार
नहीं
हो
सकता
तेरे
होते
हुए
जो
चाँद
का
दीदार
करे
कुछ
भी
होगा
वो
समझदार
नहीं
हो
सकता
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Zeeshan kaavish
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तेरी
यादों
को
मिटा
सकते
हैं
हर
तरफ़
फूल
खिला
सकते
हैं
तुझको
गर
भूलने
पे
आएँ
हम
इक
ही
लम्हे
में
भुला
सकते
हैं
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Zeeshan kaavish
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ख़ुशी
भी
रखते
हैं
और
ग़म
भी
साथ
रखते
हैं
हम
अपने
ज़ख़्म
का
मरहम
भी
साथ
रखते
हैं
Zeeshan kaavish
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उसी
दम
तक
समझ
लेना
तेरी
पहचान
बाक़ी
है
कि
जब
तक
रूह
में
कुछ
गर्मी
ऐ
ईमान
बाक़ी
है
ये
कह
दो
नफरतों
की
आंधियों
से
होश
में
रहना
मेरे
दिल
में
मुहब्बत
का
अभी
तूफ़ान
बाक़ी
है
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Zeeshan kaavish
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