jo raah-e-ishq men gir kar sambhal nahin saka | जो राह-ए-इश्क़ में गिर कर सँभल नहीं सकता

  - Zeeshan kaavish
जोराह-ए-इश्क़मेंगिरकरसँभलनहींसकता
वोज़िंदगीमेंकोईराहचलनहींसकता
जिसेबसालियाइकबारहमनेइसदिलमें
हमारेदिलसेवोहरगिज़निकलनहींसकता
येमेरादिलहैमुहब्बतकाऐसासूरजहै
होवक़्त-ए-शाममगरफिरभीढलनहींसकता
  - Zeeshan kaavish
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