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Zeeshan kaavish
jo raah-e-ishq men gir kar sambhal nahin saka
jo raah-e-ishq men gir kar sambhal nahin saka | जो राह-ए-इश्क़ में गिर कर सँभल नहीं सकता
- Zeeshan kaavish
जो
राह-ए-इश्क़
में
गिर
कर
सँभल
नहीं
सकता
वो
ज़िंदगी
में
कोई
राह
चल
नहीं
सकता
जिसे
बसा
लिया
इक
बार
हमने
इस
दिल
में
हमारे
दिल
से
वो
हरगिज़
निकल
नहीं
सकता
ये
मेरा
दिल
है
मुहब्बत
का
ऐसा
सूरज
है
हो
वक़्त-ए-शाम
मगर
फिर
भी
ढल
नहीं
सकता
- Zeeshan kaavish
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इश्क़
में
धोखा
खाने
वाले
बिल्कुल
भी
मायूस
न
हो
इस
रस्ते
में
थोड़ा
आगे
मयख़ाना
भी
आता
है
Darpan
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हम
भी
दरिया
हैं
हमें
अपना
हुनर
मालूम
है
जिस
तरफ़
भी
चल
पड़ेंगे
रास्ता
हो
जाएगा
Bashir Badr
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भूल
जोते
हैं
मुसाफ़िर
रस्ता
लोग
कहते
हैं
कहानी
फिर
भी
Ambreen Haseeb Ambar
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कोई
काँटा
कोई
पत्थर
नहीं
है
तो
फिर
तू
सीधे
रस्ते
पर
नहीं
है
मैं
इस
दुनिया
के
अंदर
रह
रहा
हूँ
मगर
दुनिया
मेरे
अंदर
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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मेरी
दुनिया
उजड़
गई
इस
में
तुम
इसे
हादसा
समझते
हो
आख़िरी
रास्ता
तो
बाक़ी
है
आख़िरी
रास्ता
समझते
हो
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Himanshi babra KATIB
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कभी
किसी
न
किसी
राह
पर
मिलेंगे
फिर
हम
एक
से
ही
ख़यालात
पेश
करते
हुए
shaan manral
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चाँद
का
फिर
मेरा
रस्ता
देखती
आँखें
तुम्हारी
आज
करवाचौथ
के
दिन
काश
हम
तुम
साथ
होते
Gaurav Singh
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चलते
हुए
मुझ
में
कहीं
ठहरा
हुआ
तू
है
रस्ता
नहीं
मंज़िल
नहीं
अच्छा
हुआ
तू
है
Abhishek shukla
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हर
तरफ़
उग
आए
हैं
जंगल
हमारी
हार
के
जीत
का
कोई
भी
रस्ता
अब
नहीं
दिखता
हमें
Siddharth Saaz
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अगर
तुम
हो
तो
घबराने
की
कोई
बात
थोड़ी
है
ज़रा
सी
बूँदा-बाँदी
है
बहुत
बरसात
थोड़ी
है
ये
राह-ए-इश्क़
है
इस
में
क़दम
ऐसे
ही
उठते
हैं
मोहब्बत
सोचने
वालों
के
बस
की
बात
थोड़ी
है
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Abrar Kashif
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गुल
भी
हो
सकता
है
और
जाम
भी
हो
सकता
है
हुस्न
का
तेरे
कोई
नाम
भी
हो
सकता
है
अपने
किरदार
से
ऐ
नाम
कमाने
वाले
तेरी
ख़ातिर
कोई
बदनाम
भी
हो
सकता
है
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Zeeshan kaavish
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ख़ुशी
भी
रखते
हैं
और
ग़म
भी
साथ
रखते
हैं
हम
अपने
ज़ख़्म
का
मरहम
भी
साथ
रखते
हैं
Zeeshan kaavish
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ऐसी
हालत
नहीं
हुई
होती
गर
मुहब्बत
नहीं
हुई
होती
ज़िंदगी
किस
तरह
बसर
करते
तेरी
चाहत
नहीं
हुई
होती
हम
दीवानों
पे
वो
ही
हँसता
है
जिसको
उल्फ़त
नहीं
हुई
होती
रफ़्ता
रफ़्ता
तुझे
भुलाते
अगर
तेरी
आदत
नहीं
हुई
होती
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Zeeshan kaavish
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काम
मुश्किल
था
मगर
कर
जाता
ज़ख़्म-ए-दिल
मेरा
कोई
भर
जाता
सिगरटों
ने
मुझे
बचाया
है
गर
न
पीता
इन्हें
तो
मर
जाता
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Zeeshan kaavish
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अजी
छोड़िए
भी
ये
नफ़रत
की
बातें
बहुत
ही
बुरी
हैं
सियायत
की
बातें
उदासी
की
चादर
लपेटे
पड़ा
हूँ
करे
कोई
आके
मुहब्बत
की
बातें
तेरे
हुस्न
का
ज़िक्र
होगा
यक़ीनन
चलेंगी
जहाँ
भी
क़यामत
की
बातें
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Zeeshan kaavish
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