is shahar ke surkh nazaaron men ek zard sa qasba yaad aaya | इस शहर के सुर्ख़ नज़ारों में, एक ज़र्द- सा क़स्बा याद आया

  - Yogendra Dutt Sharma
इसशहरकेसुर्ख़नज़ारोंमें,एकज़र्द-साक़स्बायादआया
दिन-रातकेमस्तउजालोंमें,एकशामकाचेहरायादआया
इसज़द्दोजहद,हंगा
मेंमें,सबप्यार-मुहब्बतभूलेथे
घरछोड़तेवक़्तका,वोतेराछूटाहुआजुमलायादआया
तक़दीरहैक्या,तदबीरहैक्या,यहएकक़शमकशसाथचली
दरियाकीउफनतीलहरोंमें,एकऊंघतासहरायादआया
तक़दीरहैक्या,तदबीरहैक्या,यहएकक़शमकशसाथचली
दरियाकीउफनतीलहरोंमें,एकऊंघतासहरायादआया
सदियोंकीकला,सदियोंकाहुनर,सदियोंकेनिशां,सदियोंकासफ़र
फिरभीइसदौरकीहलचलमें,बग़दादकानक़्शायादआया
गंगाकानमन,जमुनाकीछुअन,ग़ालिबकीग़ज़ल,मीराकेभजन
एकसब्ज़-सीबस्तीमेंअक्सरएकटूटतापत्तायादआया
वोशान,वोशोहरत,वोरौनक़,वोभीड़,वोयारोंकीमहफ़िल
कलरातजोदेखाआईना,एकपेड़वोतन्हायादआया
ईमान,वफ़ा,क़स्में,वादे,अहसास,वोनर्मफ़रेबोंके
जज़्बातकेउजड़ेगुलशनमें,एकप्यासापरिंदायादआया
  - Yogendra Dutt Sharma
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy