kuchh log jo nakhwat se mujhe ghur rahe hain | कुछ लोग जो नख़वत से मुझे घूर रहे हैं

  - Yawar Abbas
कुछलोगजोनख़वतसेमुझेघूररहेहैं
माहौलसेशायदयेबहुतदूररहेहैं
क्याकहिएकिक्याहोगयाइसशहरकाआलम
जिसशहरमेंउल्फ़तकेभीदस्तूररहेहैं
मजबूरकिसेकहतेहैंयेकौनबताए
पूछेकोईउनसेकिजोमजबूररहेहैं
कुछलोगसर-ए-दाररहेहोंतोरहेहों
हमहैंकिबहर-तौरसर-ए-तूररहेहैं
हँसतेहुएचेहरोंपेजासीनोंमेंउनके
हालातकेटकरावसेनासूररहेहैं
शैख़ग़नीमतहैअगरहमकोसमझलो
हममंसब-ए-तस्दीक़पेमामूररहेहैं
इकतुमकिख़ुदाईकेभीदावेरहेतुमको
इकहमकिइसइक़रारसेमअज़ूररहेहैं
सुक्कान-ए-हरमक्याहैंयेमुझसेकोईपूछे
अल्लाहकेघरमेंभीयेमग़रूररहेहैं
एहसानबड़ाबोझहैइसख़ौफ़से'यावर'
दीवारकेसाएसेभीहमदूररहेहैं
  - Yawar Abbas
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