mujh ko utaar harf men jaan-e-ghazal banaa mujhe | मुझ को उतार हर्फ़ में जान-ए-ग़ज़ल बना मुझे

  - Yasmeen Habeeb
मुझकोउतारहर्फ़मेंजान-ए-ग़ज़लबनामुझे
मेरीहीबातमुझसेकरमेराकहासुनामुझे
रख़्श-ए-अबद-ख़िरामकीथमतीनहींहैंबिजलियाँ
सुब्ह-ए-अज़ल-निज़ादसकरनाहैमशवरामुझे
लौह-ए-जहाँसेपेशतरलिक्खाथाक्यानसीबमें
कैसीथीमेरीज़िंदगीकुछतोचलेपतामुझे
कैसेहोंख़्वाबआँखमेंकैसाख़यालदिलमेंहो
ख़ुदहीहरएकबातकाकरनाथाफ़ैसलामुझे
छोटेसेइकसवालमेंदिनहीगुज़रगयामिरा
तूहैकिअबनहींहैतूबसयेज़राबतामुझे
कैसेगुज़रनाहैमुझेउसपुल-सिरात-ए-वक़्तसे
वैसेतोदेगएसभीजातेहुएदु'आमुझे
मेरासफ़रमिराहीथाउठतेकिसीकेक्याक़दम
अपनेलिएथाखोजनाअपनाहीनक़्श-ए-पामुझे
लगताहैचलरहीहूँमैंरूह-ए-तमामकीतरफ़
जैसीथीइब्तिदामुझेवैसीहैइंतिहामुझे
  - Yasmeen Habeeb
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