banaa hua tha kahii aab-daan kaaghaz par | बना हुआ था कहीं आब-दान काग़ज़ पर

  - Yasir Khan
बनाहुआथाकहींआब-दानकाग़ज़पर
थीइतनीप्यासकिरखदीज़बानकाग़ज़पर
किराएदारकीआँखोंमेंगएआँसू
बनाएबैठेथेबच्चेमकानकाग़ज़पर
तुम्हारेख़तमेंनज़रआईइतनीख़ामोशी
किमुझकोरखनेपड़ेअपनेकानकाग़ज़पर
तमामउम्रगुज़ारीहैधूपमेंशायद
बनारहाहैकोईसाएबानकाग़ज़पर
उठालियाहैक़लमअबतोमैंनेभी'यासिर'
उतारडालूँगासारीथकानकाग़ज़पर
  - Yasir Khan
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