sun ke bhi chup hi raha | सुन के भी चुप ही रहा

  - Yameen
सुनकेभीचुपहीरहा
तल्ख़बातेंमुश्क-बारअफ़्ग़ानीक़हवेके
रसीलेघूँटमेंघुल-मिलगईं
येहक़ीक़तऔरथीकिबापदादाक़िस्सा-गोमशहूरथे
इसलिएवोचुपरहा
तारीख़केनक़्शेमें
जिनशहरोंकीशोहरतगूँजतीहै
वोख़मोशीकेइसअज़लीरंगसेज़ाहिरहुए
जिससेशनासाईनहींहै
इसहुजूम-ए-शोर-ओ-शरकी
उसनेसोचा
याद-गारीचौकमेंचारोंतरफ़
येबोलतेबाज़ारहैं
इसलिएअफ़्सुर्दगीमेंगुमखड़े
उसबेद-ए-मजनूँपर
नज़रपड़तीनहीं
जोअकेलारहगयाहैक़िस्सा-ख़्वानोंमेंयहाँ
बे-रंगउखड़तीछालपर
चाक़ूसेकंदानामफीकापड़गयाहै
कंदा-कारीजामिलीहैख़ाकसे
वक़्तकीग़फ़लतनेक्यासाबितकिया
ज़ख़्मखानेऔरलगानेवालोंमें
कौनफ़तह-याबहैं
शीरीं-गुल!
आगेसुना
क्यासब्ज़आँखोंमेंभीख़ाकीख़्वाबहैं
  - Yameen
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