tumhaari yaad men kuchh yuñ naye mausam banata hooñ | तुम्हारी याद में कुछ यूँँ नए मौसम बनाता हूँ

  - Yahya Khan Yusuf Zai
तुम्हारीयादमेंकुछयूँँनएमौसमबनाताहूँ
मैंसहरा-ए-जुनूँमेंरेतसेशबनमबनाताहूँ
वोमुझकोज़ख़्मदेनेकेलिएख़ंजरबनातेहैं
मैंउनकोठीककरनेकेलिएमरहमबनाताहूँ
तिरीसूरतनिगाह-ओ-ज़ेहनमेंछाईहुईहैयार
मैंसुब्ह-ओ-शामतस्वीरोंकाइकएल्बमबनाताहूँ
मैंख़ुदकोरेशारेशाफ़िक्र-ओ-फ़नसेओढ़लेताहूँ
ग़ज़लकेशे'रकीतरकीबमेंरेशमबनाताहूँ
येहर्फ़-ओ-सौतकीजादूगरीयूँँहीनहींआती
मैंख़ुदकोसर्फ़करकेनग़्मा-हा-ए-ग़मबनाताहूँ
  - Yahya Khan Yusuf Zai
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