mazaa gunaah ka jab tha ki ba-wazoo karte | मज़ा गुनाह का जब था कि बा-वज़ू करते

  - Yagana Changezi
मज़ागुनाहकाजबथाकिबा-वज़ूकरते
बुतोंकोसज्दाभीकरतेतोक़िबला-रूकरते
कभीपरवरिश-ए-नख़्ल-ए-आरज़ूकरते
नुमूसेपहलेजोअंदेशा-ए-नुमूकरते
सुनेंदिलसेतोफिरक्यापड़ीथीख़ारोंको
किगुलकोमहरम-ए-अंजाम-ए-रंग-ओ-बूकरते
गुनाहथाभीतोकैसागुनाह-बे-लज़्ज़त
क़फ़समेंबैठकेक्यायाद-ए-रंग-ओ-बूकरते
बहानाचाहतीथीमौतबसथाअपना
किमेज़बानी-ए-मेहमान-ए-हीला-ए-जुकरते
दलील-ए-राहदिल-ए-शबचराग़थातन्हा
बुलंद-ओ-पस्तमेंगुज़रीहैजुस्तुजूकरते
अज़लसेजोकशिश-ए-मरकज़ीकेथेपाबंद
हवाकीतरहवोक्यासैरचार-सूकरते
फ़लकनेभूल-भुलय्योंमेंडालरक्खाथा
हमउनकोढूँडतेयाअपनीजुस्तुजूकरते
असीर-ए-हालमुर्दोंमेंहैंज़िंदोंमें
ज़बानकटतीहैआपसमेंगुफ़्तुगूकरते
पनाहमिलतीउम्मीद-ए-बे-वफ़ाकोकहीं
हवस-नसीबअगरतर्क-ए-आरज़ूकरते
  - Yagana Changezi
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