दिलअजबजल्वा-ए-उम्मीददिखाताहैमुझे
शामसे'यास'सवेरानज़रआताहैमुझे
जल्वा-ए-दार-ओ-रसनअपनेनसीबोंमेंकहाँ
कौनदुनियाकीनिगाहोंपेचढ़ाताहैमुझे
दिलकोलहराताहैहंगामा-ए-ज़िंदान-ए-बला
शोर-ए-ईज़ा-तलबीवज्दमेंलाताहैमुझे
पा-ए-आज़ादहैज़िंदाँकेचलनसेबाहर
बेड़ियाँक्यूँँकोईदीवानापहनाताहैमुझे
हँसकेकहताहैकिघरअपनाक़फ़सकोसमझो
सबक़उल्टामिरासय्यादपढ़ाताहैमुझे
जैसेदोज़ख़कीहवाखाकेअभीआयाहै
किसक़दरवाइज़-ए-मक्कारडराताहैमुझे
फटपड़ेंअबहीदर-ओ-बामतोपर्दारहजाए
फ़लक-ए-ख़ाना-ख़राबआँखदिखाताहैमुझे
दीदनीहैचमन-आराई-ए-चश्म-ए-इबरत
सैर-ए-ताज़ागुल-ए-पज़मुर्दादिखाताहैमुझे
तर्क-ए-मतलबसेहैमतलबतोदुआएँकैसी
सुब्हतकक्यूँँदिल-ए-बीमारजगाताहैमुझे
नंग-ए-महफ़िलमिराज़िंदामिरामुर्दाभारी
कौनउठाताहैमुझेकौनबिठाताहैमुझे
लब-ए-दरियाकाहुआमैंनतह-ए-दरियाका
कौनसेघाटयेधारालिएजाताहैमुझे
पाँवसोएहैंमगरजागतेहैंअपनेनसीब
क्यासमझकरजरस-ए-गुंगजगाताहैमुझे
'यास'मंज़िलहैमिरीमंज़िल-ए-अनक़ा-ए-कमाल
लखनऊमेंकोईक्यूँँढूँडनेआताहैमुझे