liptati hai bahut yaad-e-watan jab daaman-e-dil se | लिपटती है बहुत याद-ए-वतन जब दामन-ए-दिल से

  - Yagana Changezi
लिपटतीहैबहुतयाद-ए-वतनजबदामन-ए-दिलसे
पलटकरइकसलाम-ए-शौक़करलेताहूँमंज़िलसे
नज़रआएजबआसार-ए-जुदाईरंग-ए-महफ़िलसे
निगाह-ए-'यास'बेगानाहुईयारान-ए-यक-दिलसे
उभरनेकेनहींबहर-ए-फ़नामेंडूबनेवाले
दुर-ए-मक़सूदहीग़महैतोफिरक्याकामसाहिलसे
तसव्वुरलाला-ओ-गुलकाख़िज़ाँमेंभीनहींमिटता
निगाह-ए-शौक़वाबस्ताहैअबतकनक़्श-ए-बातिलसे
नहींमा'लूमक्यालज़्ज़तउठाईहैअसीरीमें
दिल-ए-वहशीफड़कउठताहैआवाज़-ए-सलासिलसे
किसीशयमेंहोगीबादा-ए-इरफ़ाँकीगुंजाइश
लड़ालेसाग़र-ए-जमकोभीकोईशीशा-ए-दिलसे
तसव्वुरनेदिखायाशाहिद-ए-मक़्सूदकाजल्वा
उतरआईहैलैलासर-ज़मीन-ए-दिलपेमहमिलसे
रहेगीचारदीवार-ए-अनासिरदरमियाँकबतक
उठेगाज़लज़लाइकदिनइसीबैठेहुएदिलसे
कहाँतकपर्दा-ए-फ़ानूससेसरकीबलाटलती
अज़लसेलागथीबाद-ए-फ़नाकोशम-ए-महफ़िलसे
यहींसेसैरकरलो'यास'इतनीदूरक्यूँँजाओ
अदमआबादकरडांडामिलाहैकू-ए-क़ातिलसे
  - Yagana Changezi
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