agar apni chashm-e-nam par mujhe ikhtiyaar hota | अगर अपनी चश्म-ए-नम पर मुझे इख़्तियार होता

  - Yagana Changezi
अगरअपनीचश्म-ए-नमपरमुझेइख़्तियारहोता
तोभलायेराज़-ए-उल्फ़तकभीआश्कारहोता
हैतुनुक-मिज़ाजसय्यादकुछअपनाबसनहींहै
मैंक़फ़सकोलेकेउड़ताअगरइख़्तियारहोता
येज़रासीइकझलकनेदिलजाँकोयूँँजलाया
तिरीबर्क़-ए-हुस्नसेफिरकोईक्यादो-चारहोता
अजीतौबाइसगरेबाँकीभलाबिसातक्याथी
येकहोकिहाथउलझानहींतार-तारहोता
वोआतेफ़ातिहाकोज़रामुड़केदेखलेते
तोहुजूम-ए-'यास'इतनासर-ए-मज़ारहोता
  - Yagana Changezi
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