सोज़-ए-अलमसेदूरहुआजारहाहूँमैं
वोतोजलारहेहैंबुझाजारहाहूँमैं
मानूस-ए-इल्तिफ़ातहुआजारहाहूँमैं
देखऐनिगाह-ए-नाज़मिटाजारहाहूँमैं
जल्वोंकीताबिशेंहैंकिअल्लाहकीपनाह
रंगींतजल्लियोंमेंघिराजारहाहूँमैं
येआतेजातेहैनिगह-ए-ग़ैज़किसलिए
लेआजतेरेदरसेउठाजारहाहूँमैं
राहोंसेआश्नाहूँनमंज़िल-शनासहूँ
लेजारहाहैशौक़चलाजारहाहूँमैं
कैफ़िय्यतउसनिगाहकीहमदमबताऊँक्या
इकमौजहैकिजिसमेंबहाजारहाहूँमैं
याइब्तिदा-ए-इश्क़मेंग़ममेरेसाथथा
याग़मकेसाथसाथचलाजारहाहूँमैं
क्याचीज़हैनवेद-ए-रिहाईकिहम-नफ़स
जैसेक़फ़ससमेतउड़ाजारहाहूँमैं
मेरीतबाहियोंपेज़मानेकोरश्कहै
तुमतोमिटारहेहोबनाजारहाहूँमैं