जबमैंतेरेपुकारनेपेनआऊँ
जबमेरेक़दमोंकेनक़्शतेरीगलियोंसेमिटजाएँ
जबतेरीहिचकियाँभीरुकजाए
लगेकीकोईयादनहींकररहा
यानहींआएआवाज़किसीमहफ़िलसे
नहींआएआवाज़मेरी,कोईनज़्मपढ़तेहुए
जबकोईमुंतज़िरआँखेंनहींदिखेतुम्हें
यादिखेइकलड़कीरोतीहुई
जोसिसकियाँलेकर,पढ़रहीहोमेरीग़ज़लें
जबख़ालीदिखेतुम्हेंवोचबूतरा,जहाँ
मैंबैठकरग़ज़ललिखताथा
जबवोगलीभीसुनसानदिखे,
जहाँहमारीदास्ताँकाआगाज़हुआथा,
यादिखेवोमोड़आवारा,
जहाँहममिलकर,बिछड़गएथे,
जबमेरेनामपेहरनज़रझुकजाए,
तबपूछनाकिसीबच्चेसे,
औरआजाना
शहरकेआख़िरीकब्रपे,
इकगुलाबलेकर,
रखनागुलाबमेरीकब्रपर,
औरइकआख़िरीबारआवाजलगानामुझे,
फिरकहना
अलविदा,
अलविदामेरेदोस्त,
अलविदामेरेशायर
औरखोजानाशहरकेभीड़में