"मेरे बाद"

  - Satyam Bhaskar "Bulbul"
"मेरेबाद"
जबमैंतेरेपुकारनेपेआऊँ
जबमेरेक़दमोंकेनक़्शतेरीगलियोंसेमिटजाएँ
जबतेरीहिचकियाँभीरुकजाए
लगेकीकोईयादनहींकररहा
यानहींआएआवाज़किसीमहफ़िलसे
नहींआएआवाज़मेरी,कोईनज़्मपढ़तेहुए
जबकोईमुंतज़िरआँखेंनहींदिखेतुम्हें
यादिखेइकलड़कीरोतीहुई
जोसिसकियाँलेकर,पढ़रहीहोमेरीग़ज़लें
जबख़ालीदिखेतुम्हेंवोचबूतरा,जहाँ
मैंबैठकरग़ज़ललिखताथा
जबवोगलीभीसुनसानदिखे,
जहाँहमारीदास्ताँकाआगाज़हुआथा,
यादिखेवोमोड़आवारा,
जहाँहममिलकर,बिछड़गएथे,
जबमेरेनामपेहरनज़रझुकजाए,
तबपूछनाकिसीबच्चेसे,
औरजाना
शहरकेआख़िरीकब्रपे,
इकगुलाबलेकर,
रखनागुलाबमेरीकब्रपर,
औरइकआख़िरीबारआवाजलगानामुझे,
फिरकहना
अलविदा,
अलविदामेरेदोस्त,
अलविदामेरेशायर
औरखोजानाशहरकेभीड़में
  - Satyam Bhaskar "Bulbul"
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