लगारक्खीहैउसनेभीड़मज़हबकी,सियासतकी
मदारीहै,भलासमझेगाक्याक़ीमतमुहब्बतकी
महलतोसबनेदेखा,नींवकापत्थरनहींदेखा
टिकीहैज़िंदगीजिसपरभरी-पूरीइमारतकी
अजबइंसाफ़है,मजबूरकोमग़रूरकहतेहो
चढ़ारक्खीहैंतुमनेऐनकेंआँखोंपेनफ़रतकी
हमअपनीआस्तीनोंसेहीआँखेंपोंछलेतेहैं
हमारेआँसुओंनेकबकिसीदामनकीचाहतकी
हमारेसाथहैंमहकीहुईयादोंकेकुछलश्कर
वोकुछलमहेइबादतके,वोकुछघड़ियाँमुहब्बतकी
वोचेहरेसेहीमेरेदिलकीहालतभाँपलेताहै
ज़रूरतहीनहींपड़तीकभीशिकवा-शिकायतकी
डरीसहमीहुईसच्चाइयोंकेज़र्दचेहरोंपर
गवाहीहैसियासतकी,इबारतहैअदालतकी
हैंअबतकयादहमको‘नाज़’वोबीतीहुईघड़ियाँ
कभीतुमनेशरारतकी,कभीहमनेशरारतकी