Iftikhar Shahid Abu Saad

Iftikhar Shahid Abu Saad

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Iftikhar Shahid Abu Saad shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Iftikhar Shahid Abu Saad's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
येसोचाहैकिमरजाएँतुम्हारेवारसेपहले
तुम्हारीजीतहोजाएहमारीहारसेपहले
किसीलम्हेतुम्हारावारकारीहोभीसकताहै
मगरयेसरहीजाएगामिरीदस्तारसेपहले
बताकितनागिरासकताहूँख़ुदकोतेरीख़्वाहिशपर
मिरामेआ'रभीतोहैतिरेमेआ'रसेपहले
नज़ारा-हा-ए-दिलकशसेगुज़रजाताथाबेगाना
मगरक़ामत-ए-ज़ेबातिरेदीदारसेपहले
सितारोंकीतरहचमकेहमारेख़ूनकेछींटे
किहमनेसरकटायाहैफ़राज़-ए-दारसेपहले
तलातुम-ख़ेज़मौजोंसेमुझेलड़नातोआताहै
मगरमैंडूबसकताहूँकभीमंजधारसेपहले
तिराहीअक्समेरीआँखकेतिलमेंफ़रोज़ाँहै
तुझेमैंदेखसकताहूँतिरेदीदारसेपहले
कहींभीजुर्मसेपहलेसज़ावाजिबनहींहोती
कोईकाफ़िरनहींहोतामगरइंकारसेपहले
नएइम्कानढूँडेगीहमारीजुस्तुजू'शाहिद'
हमअबकेदरबनाएँगेमगरदीवारसेपहले
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Iftikhar Shahid Abu Saad
वोख़्वाबयाख़यालहैमैंजानलूँतोकुछकहूँ
जोरंज-ए-माह-ओ-सालहैमैंजानलूँतोकुछकहूँ
अभीमुझेख़बरनहींमैंकिसलिएउदासहूँ
जोहुज़्नहैमलालहैमैंजानलूँतोकुछकहूँ
ग़ुबार-ए-आरज़ूछटेतोफिरकोईख़बरमिले
येहिज्रहैविसालहैमैंजानलूँतोकुछकहूँ
फ़क़ीह-ए-शहरएकजामपीकेदेखलूँज़रा
हरामयाहलालहैमैंजानलूँतोकुछकहूँ
कईदिनोंसेएकशे'रभीनहींकहागया
उरूजयाज़वालहैमैंजानलूँतोकुछकहूँ
गोज़ख़्मसिलगएमगरकसकतोऔरबढ़गई
येकैसाइंदिमालहैमैंजानलूँतोकुछकहूँ
कलीचटकनेदीजिएअभीमुझसेपूछिए
येज़र्दहैकिलालहैमैंजानलूँतोकुछकहूँ
रदीफ़औरक़ाफ़िएनिभादिएगएमगर
ग़ज़लभीला-ज़वालहैमैंजानलूँतोकुछकहूँ
अभीतोमेरेपासथाअभीयेदिलकिधरगया
येज़ुल्फ़हैकिजालहैमैंजानलूँतोकुछकहूँ
हमारेसाथयारलोगफिरसेहाथकरगए
याअबकेतेरीचालहैमैंजानलूँतोकुछकहूँ
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