मैंरंग-ए-आसमाँकरकेसुनहरीछोड़देताहूँ
वतनकीख़ाकलेकरएकमुट्ठीछोड़देताहूँ
येक्याकमहैकिहक़्क़-ए-ख़ुद-परस्तीछोड़देताहूँ
तुम्हारानामआताहैतोकुर्सीछोड़देताहूँ
मैंरोज़-ए-जश्नकीतफ़्सीललिखकररखतोलेताहूँ
मगरउसजश्नकीतारीख़ख़ालीछोड़देताहूँ
बहुतमुश्किलहैमुझसेमय-परस्तीकैसेछूटेगी
मगरहाँआजसेफ़िर्का-परस्तीछोड़देताहूँ
ख़ुदअपनेहाथसेरस्म-ए-विदाईकरतोदीपरअब
कोईबारातआतीहैतोबस्तीछोड़देताहूँ
तुम्हारेवस्लकाजिसदिनकोईइम्कानहोताहै
मैंउसदिनरोज़ारखताहूँबुराईछोड़देताहूँ
हुकूमतमिलगईतोउनकाकूचाछूटजाएगा
इसीनुक़्तेपेआकरबादशाहीछोड़देताहूँ
मुबारकहोतुझेसद-आफ़रींऐशान-ए-महरूमी
तिरेपहलूमेंआकेघर-गृहस्तीछोड़देताहूँ