नक़्श-ओ-निगार-ए-माज़ीरहरहकेयादआए
दोचारख़ूँकेक़तरेपलकोंपेडगमगाए
तीरोंनेख़ुद-कुशीकी,दमख़ंजरोकानिकला
बिस्मिलनेहँसतेहँसतेसीनेपेज़ख़्मखाए
इसबारभीउदासीहमसेसँभलनपाई
इसबारभीबज़ाहिरहमख़ूबमुस्कुराए
सुनअबकेइकअनोखीतरकीबमुझकोसूझी
मैंतुझकोभूलजाऊँ,तूमुझकोभूलजाए
दिलखोलकरकेमैंनेख़ुदकोहदफ़बनाया
दिलखोलकरकेउसनेसबतीरआज़माए
मैंअपनीआबरूकीमिट्टीपलीदकरदूँ
लेकिनतेरीअनापरहरगिज़नहर्फ़आए
बस्तीमेंरहनेवालेसबहोशखोरहेहैं
काज़िमसेजाकेकहिएग़ज़लेंनगुनगुनाए