subh-savere | सुब्ह-सवेरे

  - Wazir Agha
सुब्ह-सवेरे
एकलरज़तीकाँपतीसीआवाज़आतीहै
सोनेवालो!तुममालिककोभूलगएहो
तुममालिककोभूलगएहो
फिरचमकीलीमिलकासायरन
एकग़लीज़डरानेवालीतुंदसदाकेरूपमेंढलकर
दीवारोंसेटकराताहै
औरगलियोंके
तंगअँधेरेबाड़ेमेंकोहराममचाकर
भेड़ोंकेगल्लेकोहाँककेलेजाताहै
फिरइंजनकीबरहमसीटी
मेख़सीबनकरमेरेकानमेंगड़जातीहै
औरशबभरकीनुचीहुईइकरेलकीबोगी
अपनीकलाईइंजनकेपंजेमेंदेकर
चलपड़तीहै
फिरइकदमइकसन्नाटासाछाजाताहै
औरमैंघड़ीकीज़ालिमसूइयोंकीटिकटिकमें
दिनकेज़र्दपहाड़पेचढ़नेलगताहूँ
  - Wazir Agha
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