dukh ke roop hazaaron hain | दुख के रूप हज़ारों हैं

  - Wazir Agha
दुखकेरूपहज़ारोंहैं
हवाभीदुखऔरआगभीदुखहै
मैंतेरातूमेरादुखहै
परयेमैलेऔरगहरेआकाशकादुख
जोक़तराक़तराटपकरहाहै
इसदुखकाकोईअंतनहींहै
जबआकाशकादिलदुखताहै
बच्चेबूढ़ेशजरहजरचिड़ियाँऔरकीड़े
सबकेअंदरदुखउगताहै
फिरयेदुखआँखोंकेरस्ते
गालोंपरबहनेलगताहै
फिरठोड़ीकेपंज-नदपरसबदुखोंकेधारेमिलतेहैं
औरशबनमसामुखधरतीका
ख़ुदइकधाराबनजाताहै
सुनायहीहै
पहलेभीइकबारदुखीआकाशकीआँखेंटपकपड़ीथीं
परधरतीकीआख़िरीनाव
ज़ीस्तकेबिखरेटुकड़ोंकोछातीसेलगाए
पानीकीसरकशमौजोंसेलड़ती-भिड़ती
दूरउफ़ुक़तकजापहुँचीथी
आजमगरवोनावकौनसेदेसगईहै
दुखमैलेआकाशकादुख
अबचारोंजानिबउमडपड़ाहै
क़तराक़तराटपकरहाहै
  - Wazir Agha
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