lo raat ki baat tamaam hui | लो रात की बात तमाम हुई

  - Wazir Agha
लोरातकीबाततमामहुई
अबदिनकीबातेंकरतेहैं
सबख़्वाबतमाशेधूलहुए
औरजुगनूतारेदीपसभी
प्रकाशकेफैलेसागरमें
चमकाटदिखानाभूलगए
इकचाँदकिशबभरसाथरहा
वोचाँदभीगिरकरटूटगया
लोरातकीबाततमामहुई
अबदिनकीबातेंकरतेहैं
फूलोंकेसूजेचेहरोंपर
शबनमकीचिड़ियाँउतरीथीं
इनचिड़ियोंपरहमसूरजके
तीरोंकानिशानातकतेहैं
अध-मीचीअपनीपलकोंसे
हमगलियोंऔरबाज़ारोंमें
सोनेकेरेज़ेचुनतेहैं
औरदाग़ोंधब्बोंशिकनोंसे
दीवारेंकालीकरतेहैं
फिरउजलेकाग़ज़परलिक्खी
सबगंदीख़बरेंपढ़तेहैं
लोरातकीबाततमामहुई
अबदिनकीबातेंकरतेहैं
  - Wazir Agha
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