kya dukh hai samundar ko bataa bhi nahin saka | क्या दुख है समुंदर को बता भी नहीं सकता

  - Waseem Barelvi
क्यादुखहैसमुंदरकोबताभीनहींसकता
आँसूकीतरहआँखतकभीनहींसकता
तूछोड़रहाहैतोख़ताइसमेंतिरीक्या
हरशख़्समिरासाथनिभाभीनहींसकता
प्यासेरहेजातेहैंज़मानेकेसवालात
किसकेलिएज़िंदाहूँबताभीनहींसकता
घरढूँडरहेहैंमिरारातोंकेपुजारी
मैंहूँकिचराग़ोंकोबुझाभीनहींसकता
वैसेतोइकआँसूहीबहाकरमुझेलेजाए
ऐसेकोईतूफ़ानहिलाभीनहींसकता
  - Waseem Barelvi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy