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Wajid Husain Sahil
us se kehna ki vo ab mujhse kinaara kar le
us se kehna ki vo ab mujhse kinaara kar le | उस से कहना कि वो अब मुझ सेे किनारा कर ले
- Wajid Husain Sahil
उस
से
कहना
कि
वो
अब
मुझ
सेे
किनारा
कर
ले
ये
भी
कहना
मैं
तिरे
प्यार
का
मोहताज
नहीं
- Wajid Husain Sahil
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तुम
भला
उस
प्रेम
की
गहराई
क्या
समझोगे
जानाँ
जो
कभी
ख़्वाबों
में
भी
अपनी
न
सरहद
लाँघता
है
Harsh saxena
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सियाह
रात
की
सरहद
के
पार
ले
गया
है
अजीब
ख़्वाब
था
आँखें
उतार
ले
गया
है
है
अब
जो
ख़ल्क़
में
मजनूँ
के
नाम
से
मशहूर
वो
मेरी
ज़ात
से
वहशत
उधार
ले
गया
है
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Abhishek shukla
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पा
के
तूफ़ां
का
इशारा
दरिया
तोड़
देता
है
किनारा
दरिया
Abdul Mannan Tarzi
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है
नाज़
मुझको
अपनी
हिंदी
ज़बाँ
पे
यारो
हिंदी
हैं
हम
वतन
हैं
ये
देश
सब
सेे
आला
Dr Mohsin Khan
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कभी
तो
नस्ल-ओ-वतन-परस्ती
की
तीरगी
को
शिकस्त
होगी
कभी
तो
शाम-ए-अलम
मिटेगी
कभी
तो
सुब्ह-ए-ख़ुशी
मिलेगी
Abul mujahid zaid
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ज़हर
खा
खा
कर
गुज़ारा
कर
रहे
हैं
आजकल
ज़िंदगी
तुझ
सेे
किनारा
कर
रहे
हैं
आजकल
तू
बहुत
ही
दिलनशीं
है,
महजबीं
है
तू
मगर
तुझको
अपनाकर
ख़सारा
कर
रहे
हैं
आजकल
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Hameed Sarwar Bahraichi
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फिर
नए
साल
की
सरहद
पे
खड़े
हैं
हम
लोग
राख
हो
जाएगा
ये
साल
भी
हैरत
कैसी
Aziz Nabeel
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लहू
वतन
के
शहीदों
का
रंग
लाया
है
उछल
रहा
है
ज़माने
में
नाम-ए-आज़ादी
Firaq Gorakhpuri
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काम
आया
तिरंगा
कफ़न
के
लिए
कोई
क़ुर्बां
हुआ
था
वतन
के
लिए
सोचो
क्या
कर
लिया
तुमने
जी
कर
के
दोस्त
नस
भी
काटी
तो
बस
इक
बदन
के
लिए
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Neeraj Neer
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मुहब्बत
में
जो
माथा
चूम
कर
वा'दा
किया
उसने
उसे
भी
आम
बातों
का
ही
दर्जा
दे
दिया
उसने
सुधा
के
नाम
पर
विषपान
अब
हम
सेे
नहीं
होगा
सुना
ज्यूँँ
ही
मुहब्बत
से
किनारा
कर
लिया
उसने
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Atul K Rai
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हाट
इक
रोज़
मेरे
गाँव
का
आकर
देखो
यहाँ
फ्रीज़र
नहीं
मिट्टी
के
घड़े
मिलते
हैं
Wajid Husain Sahil
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मंतर
आँखों
से
पढ़
गई
जानाँ
बै-पिए
मुझको
चढ़
गई
जानाँ
हाल
अपना
भी
क़ैस
जैसा
है
अब
तो
दाढ़ी
भी
बढ़
गई
जानाँ
दिल
का
रस्ता
तुझे
दिखाया
था
तू
तो
माथे
पे
चढ़
गई
जानाँ
जुर्म
कर
के
तू
अपनी
आँखों
से
दिल
पे
इल्ज़ाम
मढ़
गई
जानाँ
जब
नज़र
से
नज़र
मिली
'साहिल'
दिल
के
सब
राज़
पढ़
गई
जानाँ
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Wajid Husain Sahil
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ये
जहाँ
प्यार
ही
से
रौशन
है
कुछ
यहाँ
प्यार
बिन
नहीं
होता
प्यार
की
एक
उम्र
होती
है
प्यार
का
एक
दिन
नहीं
होता
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Wajid Husain Sahil
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हौसला
हार
गया,
ज़ब्त
ने
दम
तोड़
दिया
गिर
के
अश्कों
ने
तबस्सुम
का
भरम
तोड़
दिया
Wajid Husain Sahil
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मशहूर
कितना
हो
गया
हूँ
इश्क़
में
तिरे
गूगल
पे
लिख
के
नाम
मिरा
देख
तो
सही
Wajid Husain Sahil
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