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Wajid Husain Sahil
kahaan asl men vasl mumkin hamaara
kahaan asl men vasl mumkin hamaara | कहाँ अस्ल में वस्ल मुमकिन हमारा
- Wajid Husain Sahil
कहाँ
अस्ल
में
वस्ल
मुमकिन
हमारा
चलो
ख़्वाब
में
वाँ
मुलाक़ात
होगी
- Wajid Husain Sahil
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इस
क़दर
था
खटमलों
का
चारपाई
में
हुजूम
वस्ल
का
दिल
से
मिरे
अरमान
रुख़्सत
हो
गया
Akbar Allahabadi
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सुकून
देती
थी
तब
मुझको
वस्ल
की
सिगरेट
अब
उसके
हिज्र
के
फ़िल्टर
से
होंठ
जलते
हैं
Upendra Bajpai
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आज
मिलना
था
बिछड़
जाने
की
नीयत
से
हमें
आज
भी
वो
देर
से
पहुँचा
है
कितना
तेज़
है
Tehzeeb Hafi
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यार
ने
हम
से
बे-अदाई
की
वस्ल
की
रात
में
लड़ाई
की
Meer Taqi Meer
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नज़दीकी
अक्सर
दूरी
का
कारन
भी
बन
जाती
है
सोच-समझ
कर
घुलना-मिलना
अपने
रिश्ते-दारों
में
Aalok Shrivastav
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आरज़ू
वस्ल
की
रखती
है
परेशाँ
क्या
क्या
क्या
बताऊँ
कि
मेरे
दिल
में
है
अरमाँ
क्या
क्या
Akhtar Shirani
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तुम
ने
भी
उन
से
ही
मिलना
होता
है
जिन
लोगों
से
मेरा
झगड़ा
होता
है
तुम
मेरी
दुनिया
में
बिल्कुल
ऐसे
हो
ताश
में
जैसे
हुकुम
का
इक्का
होता
है
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Zia Mazkoor
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'हर्ष'
वस्ल
में
जितनी
मर्ज़ी
शे'र
कह
लो
तुम
हिज्र
के
बिना
इन
में
जान
आ
नहीं
सकती
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Harsh saxena
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वस्ल
का
दिन
और
इतना
मुख़्तसर
दिन
गिने
जाते
थे
इस
दिन
के
लिए
Ameer Minai
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थी
वस्ल
में
भी
फ़िक्र-ए-जुदाई
तमाम
शब
वो
आए
तो
भी
नींद
न
आई
तमाम
शब
Momin Khan Momin
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हक़ीक़त
तो
हक़ीक़त
है
छुपा
लेने
से
क्या
होगा
ये
ख़्वाबों
का
महल
है
नींद
खुलते
ही
फ़ना
होगा
तुम्हारा
झूट
ख़ुद
जिस
दिन
हक़ीक़त
आशना
होगा
हमारा
कारनामा
वक़्त
की
उस
दिन
सदा
होगा
किताबों
से
हटाया
नाम
लेकिन,उस
सेे
क्या
हासिल
नहीं
मिट
पाएगा
तारीख़
में
जो
कुछ
लिखा
होगा
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Wajid Husain Sahil
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जो
कह
रहे
हैं
आप
वो
कर
क्यूँँ
नहीं
जाते
जीने
से
शिकायत
है
तो
मर
क्यूँँ
नहीं
जाते
Wajid Husain Sahil
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तब
भी
कश्ती
ख़ुदा
चलाता
है
जब
कोई
नाख़ुदा
नहीं
होता
Wajid Husain Sahil
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मंतर
आँखों
से
पढ़
गई
जानाँ
बै-पिए
मुझको
चढ़
गई
जानाँ
हाल
अपना
भी
क़ैस
जैसा
है
अब
तो
दाढ़ी
भी
बढ़
गई
जानाँ
दिल
का
रस्ता
तुझे
दिखाया
था
तू
तो
माथे
पे
चढ़
गई
जानाँ
जुर्म
कर
के
तू
अपनी
आँखों
से
दिल
पे
इल्ज़ाम
मढ़
गई
जानाँ
जब
नज़र
से
नज़र
मिली
'साहिल'
दिल
के
सब
राज़
पढ़
गई
जानाँ
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Wajid Husain Sahil
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वक़्त
हर
वक़्त
कहाँ
एक
सा
रह
पाता
है
माज़ी
जाता
है
तो
फिर
हाल
बदल
जाता
है
दिन
महीने
दरो-दीवार
वही
रहते
हैं
बस
कैलेंडर
है
जो
हर
साल
बदल
जाता
है
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Wajid Husain Sahil
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