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Wajid Husain Sahil
be-shauri ki sanad hai teraa chubhta lahjaa
be-shauri ki sanad hai teraa chubhta lahjaa | बे-शऊरी की सनद है, तेरा चुभता लहजा
- Wajid Husain Sahil
बे-शऊरी
की
सनद
है,
तेरा
चुभता
लहजा
मैं
तो
शाइर
हूँ,
गुलाबों
में
सफ़र
करता
हूँ
- Wajid Husain Sahil
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एक
मुद्दत
से
हैं
सफ़र
में
हम
घर
में
रह
कर
भी
जैसे
बेघर
से
Azhar Iqbal
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मंज़िलें
क्या
हैं,
रास्ता
क्या
है
हौसला
हो
तो
फ़ासला
क्या
है
Aalok Shrivastav
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अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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न
मंज़िलों
को
न
हम
रहगुज़र
को
देखते
हैं
अजब
सफ़र
है
कि
बस
हम-सफ़र
को
देखते
हैं
Ahmad Faraz
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सितारे
और
क़िस्मत
देख
कर
घर
से
निकलते
हैं
जो
बुज़दिल
हैं
मुहूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
हमें
लेकिन
सफ़र
की
मुश्किलों
से
डर
नहीं
लगता
कि
हम
बच्चों
की
सूरत
देखकर
घर
से
निकलते
हैं
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Abrar Kashif
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इसी
उम्मीद
से
मैं
देखता
हूँ
रास्ता
उसका
वो
आएगा
ज़मी
बंजर
में
इक
दिन
घर
उगाने
को
Kushal "PARINDA"
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मैं
था
सदियों
के
सफ़र
में
'अहमद'
और
सदियों
का
सफ़र
था
मुझ
में
Ahmad Khayal
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यही
तो
एक
तमन्ना
है
इस
मुसाफ़िर
की
जो
तुम
नहीं
तो
सफ़र
में
तुम्हारा
प्यार
चले
Aalok Shrivastav
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ज़िंदगी
अपना
सफ़र
तय
तो
करेगी
लेकिन
हम-सफ़र
आप
जो
होते
तो
मज़ा
और
ही
था
Ameeta Parsuram Meeta
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अपनी
मर्ज़ी
से
कहाँ
अपने
सफ़र
के
हम
हैं
रुख़
हवाओं
का
जिधर
का
है
उधर
के
हम
हैं
Nida Fazli
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मैं
इसलिए
भी
तिरे
वस्ल
से
झिझकता
हूँ
कहीं
फिर
इश्क़
मेरा
रायगाँ
न
हो
जाए
Wajid Husain Sahil
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एक
मुद्दत
की
रियाज़त
का
सिला
है
'साहिल'
मेरे
अश'आर
जो
लोगों
की
ज़बाँ
तक
पहुँचे
Wajid Husain Sahil
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वक़्त
हर
वक़्त
कहाँ
एक
सा
रह
पाता
है
माज़ी
जाता
है
तो
फिर
हाल
बदल
जाता
है
दिन
महीने
दर-ओ-दीवार
वही
रहते
हैं
बस
कैलेंडर
है
जो
हर
साल
बदल
जाता
है
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Wajid Husain Sahil
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क़ारी
के
हर
गुमान
से
आगे
निकल
गया
किरदार
दास्तान
से
आगे
निकल
गया
Wajid Husain Sahil
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जब
लगा
पत्थर
मुझे
माथे
पे
हैरानी
हुई
मारने
वालों
में
इक
सूरत
थी
पहचानी
हुई
Wajid Husain Sahil
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