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Wajid Husain Sahil
ab tere vasl ki ummeed ne dam tod diya
ab tere vasl ki ummeed ne dam tod diya | अब तेरे वस्ल की उम्मीद ने दम तोड़ दिया
- Wajid Husain Sahil
अब
तेरे
वस्ल
की
उम्मीद
ने
दम
तोड़
दिया
अब
तो
ख़्वाबों
में
भी
वो
रात
नहीं
आनी
है
- Wajid Husain Sahil
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दुख
की
दीमक
अगर
नहीं
लगती
ज़िन्दगी
किस
क़द्र
हसीं
लगती
वस्ल
को
लॉटरी
समझता
हूँ
लॉटरी
रोज़
तो
नहीं
लगती
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Azbar Safeer
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आरज़ू
वस्ल
की
रखती
है
परेशाँ
क्या
क्या
क्या
बताऊँ
कि
मेरे
दिल
में
है
अरमाँ
क्या
क्या
Akhtar Shirani
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यूँँ
न
कर
वस्ल
के
लम्हों
को
हवस
से
ता'बीर
चंद
पत्ते
ही
तो
तोड़े
हैं
शजर
से
मैं
ने
Khurram Afaq
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वस्ल
हो
जाए
यहीं
हश्र
में
क्या
रक्खा
है
आज
की
बात
को
क्यूँँ
कल
पे
उठा
रक्खा
है
Ameer Minai
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आज
मिलना
था
बिछड़
जाने
की
नीयत
से
हमें
आज
भी
वो
देर
से
पहुँचा
है
कितना
तेज़
है
Tehzeeb Hafi
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वो
रस्मन
पूछ
लेती
है
कि
मिलना
या
नहीं
मिलना
फिर
इसके
बाद
तो
मिलना
किसे
अच्छा
नहीं
लगता
Krishnakant Kabk
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नज़दीकी
अक्सर
दूरी
का
कारन
भी
बन
जाती
है
सोच-समझ
कर
घुलना-मिलना
अपने
रिश्ते-दारों
में
Aalok Shrivastav
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'हर्ष'
वस्ल
में
जितनी
मर्ज़ी
शे'र
कह
लो
तुम
हिज्र
के
बिना
इन
में
जान
आ
नहीं
सकती
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Harsh saxena
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मर्म
हँसने
का
समझ
पाए
ज़रा
हम
देर
से
वस्ल
जिसको
कह
रहे
थे
हिज्र
की
बुनियाद
थी
Atul K Rai
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तू
दिल
पे
बोझ
ले
के
मुलाक़ात
को
न
आ
मिलना
है
इस
तरह
तो
बिछड़ना
क़ुबूल
है
Unknown
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गिरते-पड़ते
ख़ुद
ही
मंज़िल
पा
गया
ठोकरें
खाईं
तो
चलना
आ
गया
कल
अचानक
आ
के
मेरे
सामने
दिल
मेरा
वो
ज़ोर
से
धड़का
गया
क्या
हुआ
जो
वो
न
मुझको
मिल
सका
ज़ीस्त
में
ग़म
का
मज़ा
तो
आ
गया
बाद
मुद्दत
के
मिली
उन
सेे
नज़र
और
इन
आँखों
में
पानी
आ
गया
दूसरों
के
ऐब
गिनता
था
बहुत
आइना
देखा
तो
खु़द
शरमा
गया
इश्क़
में
'साहिल'
जुदाई
शर्त
है
दिल
को
कोई
आ
के
ये
समझा
गया
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Wajid Husain Sahil
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वो
फिर
सताने
लगे
याद
हम
को
आ
कर
के
जिन्हें
भुलाया
था
हमने
खु़दा-
ख़ुदा
कर
के
Wajid Husain Sahil
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कर
के
नंबर
ही
मेरा
ब्लॉक
अचानक
उसने
दिल
यूँँ
तोड़ा
कि
त'अल्लुक़
ही
बहम
तोड़
दिया
Wajid Husain Sahil
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हमने
हर
बार
ये
सोचा,
उन्हें
कम
सोचेंगे
आँखें
जिस
रोज़
न
हो
पाएँगी
नम
सोचेंगे
उनका
कहना
हैं
"किसी
और
से
उल्फ़त
कर
लो"
हम
को
उन
सेा
कोई
मिल
जाए
तो
हम
सोचेंगे
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Wajid Husain Sahil
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वो
गया,
देखती
रहीं
आँखें
यानी
पत्थर
बनी
रहीं
आँखें
Wajid Husain Sahil
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