waqt-e-fursat jo kitaabon men safar karta hooñ | वक़्त-ए-फ़ुर्सत जो किताबों में सफ़र करता हूँ

  - Wajid Husain Sahil
वक़्त-ए-फ़ुर्सतजोकिताबोंमेंसफ़रकरताहूँ
मैंतख़य्युलकेसहाबोंमेंसफ़रकरताहूँ
जबभीउनमस्तनिगाहोंमेंसफ़रकरताहूँ
ऐसालगताहैशराबोंमेंसफ़रकरताहूँ
रू-ब-रूकेतोखोदेताहूँखु़दपरक़ाबू
इसलिएमैंतिरेख़्वाबोंमेंसफ़रकरताहूँ
बारहारुख़सेहटातेहुएजु़ल्फ़-ए-जानाँसह्र-अंगेज़हिजाबोंमेंसफ़रकरताहूँ
खु़दसेहीछेड़दियाकरताहूँबातेंतेरी
औरफिरखु़दहीइक़ाबोंमेंसफ़रकरताहूँ
बे-शऊरीकीसनदहैतेराचुभतालहजा
मैंतोशाइरहूँगुलाबोंमेंसफ़रकरताहूँ
कहींमजनूँकहींराँझाकहीं'साहिल'बनकर
मैंमुहब्बतकेनिसाबोंमेंसफ़रकरताहूँ
  - Wajid Husain Sahil
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