haqeeqat jaan kar bhi KHud ko hi samjha raha hoon main | हक़ीक़त जान कर भी ख़ुद को ही समझा रहा हूॅं मैं

  - Wajid Akhtar Badayuni
हक़ीक़तजानकरभीख़ुदकोहीसमझारहाहूॅंमैं
बहुतहीख़ासहोमुझकोयहीबतलारहाहूॅंमैं
मगरतुममुझकोहरबारीनज़रअंदाज़करतेहो
नहींकुछभीकभीऐसाकभीवैसारहाहूॅंमैं
मुझेजिसनेभीअपनारक्खादिलबहलानेकोरक्खा
किसीकीज़िंदगीमेंइससेेज़्यादाक्यारहाहूॅंमैं
हमेशादूसरोंकेबारेमेंसोचाहैमैंनेबस
मेरेकुछफ़ैसलोंपरअबबहुतपछतारहाहूॅंमैं
फ़क़तघाटेकासौदाहीकियाहैउम्रभरमैंने
ख़ुशीऔरोंकोदेकरउनकेग़मअपनारहाहूॅंमैं
  - Wajid Akhtar Badayuni
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